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अशोकनगर: सेवा के 50 साल बेमिसाल, आनंदपुर का यह अस्पताल रोज 1500 लोगों के लिए बना वरदान

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अशोकनगर: सेवा के 50 साल बेमिसाल, आनंदपुर का यह अस्पताल रोज 1500 लोगों के लिए बना वरदान


अशोकनगर, 03 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में स्थित प्रसिद्ध श्री आनंदपुर धाम न केवल अपने आध्यात्मिक वातावरण और धार्मिक कार्यों के लिए जाना जाता है, बल्कि नर सेवा को ही नारायण सेवा मानकर समाज सेवा के क्षेत्र में भी एक मिसाल कायम कर रहा है। इसी सेवा परंपरा की एक अनूठी मिसाल है धर्मार्थ चिकित्सालय सुखपुर, जिसने नि:स्वार्थ मानव सेवा के सफल 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं।

वर्ष 1977 में श्री आनंदपुर के पंचम पादशाही 108 श्री दर्शनापूर्णानन्द महाराज जी ने सुखपुर में जिस धर्मार्थ चिकित्सालय की नींव रखी थी, वह आज षष्ठम पादशाही 108 श्री विचारपूर्णानन्द जी महाराज के पावन सानिध्य में वटवृक्ष का रूप ले चुका है। आज यह अस्पताल स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में जिले का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है।

50 वर्षों का स्वर्णिम सफर: प्रबंधन से विशेष चर्चा:धर्मार्थ चिकित्सालय सुखपुर की 50 वर्षों की इस गौरवशाली एवं सेवाभावी यात्रा के अवसर पर गुरुवार को अस्पताल के प्रबंधक महात्मा श्री शब्द सागर आनंद एवं सह-प्रबंधक श्री नित रामानन्द (ज्योति महात्मा) से विशेष बातचीत की गई।

बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि पंचम पादशाही महाराज जी द्वारा रोपा गया यह सेवा का पौधा आज विशाल रूप ले चुका है। वर्तमान में षष्ठम पादशाही श्री विचारपूर्णानन्द जी के कुशल मार्गदर्शन में अस्पताल का संचालन आधुनिक और सुव्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं की मुख्य झलकियां,125 बेड की क्षमता व विशेषज्ञ:अस्पताल में 125 बेड की क्षमता है, जहां 20 विशेषज्ञ डॉक्टर अपनी निरंतर सेवा दे रहे हैं। डॉक्टरों के मार्गदर्शन के साथ-साथ लगभग 350 सेवाभावी कर्मचारी दिन-रात मरीज़ों की देखभाल और प्रबंधन में समर्पित रहते हैं। विशाल ओपीडी प्रतिदिन औसतन 1200 से 1500 मरीज यहां स्वास्थ्य लाभ लेने पहुंचते हैं।

नि:शुल्क इलाज व नाममात्र शुल्कअस्पताल में सभी प्रकार की ओपीडी, परामर्श और सामान्य उपचार पूरी तरह नि:शुल्क हैं। केवल मेजर ऑपरेशन (बड़ी सर्जरी) के लिए प्रतीकात्मक रूप से 3,000 का चार्ज लिया जाता है। वहीं हर वर्ष अस्पताल में हड्डी रोग (ऑर्थोपेडिक) और नेत्र रोग (आई कैम्प) के लिए विशाल नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाते हैं।

प्रतिमाह 1.5 करोड़ का बजट, 30 लाख की दवाएं नि:शुल्क:अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, इस पूरे धर्मार्थ सेवा प्रकल्प का संचालन करने में प्रतिमाह लगभग 1.5 करोड़ रुपये का खर्च आता है। इसमें से हर महीने करीब 30 लाख रुपये की दवाएं ज़रूरतमंद मरीज़ों को पूरी तरह मुफ़्त वितरित की जाती हैं।

दूर-दराज के जिलों से पहुंचते हैं मरीज:अपनी उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं और सेवाभाव के कारण यह अस्पताल केवल अशोकनगर तक सीमित नहीं है। यहाँ अशोकनगर के अलावा सागर, गुना, शिवपुरी, तथा उत्तर प्रदेश के ललितपुर और झांसी तक से मरीज इलाज कराने के लिए नियमित रूप से आते हैं।

देशभर में फैले हैं सेवा केंद्र:प्रबंधक महात्मा श्री शब्द सागर आनंद ने बताया कि देशभर में श्री आनंदपुर के विभिन्न आश्रमों में सुखपुर स्थित यह अस्पताल सबसे बड़ा स्वास्थ्य केंद्र है। इसके अलावा ग्वालियर, दिल्ली, पुणे जैसे प्रमुख शहरों में स्थित आश्रमों के माध्यम से भी इसी प्रकार के धर्मार्थ और जनसेवा के कार्य निरंतर चलाए जा रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार