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मीडिया और कम्युनिकेशन की पढ़ाई में शामिल होगी एआई तकनीक: कुलगुरु विजय मनोहर

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मीडिया और कम्युनिकेशन की पढ़ाई में शामिल होगी एआई तकनीक: कुलगुरु विजय मनोहर


भोपाल, 8 जुलाई (हि.स.)। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (एमसीयू) में नए शैक्षणिक सत्र से मीडिया और कम्युनिकेशन के विद्यार्थियों को उद्योग की वर्तमान जरूरतों के अनुरूप कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि आज के दौर में एआई एक अनिवार्य तकनीकी हस्तक्षेप बन चुका है और शिक्षकों के साथ-साथ शिक्षण संस्थानों को भी समय के अनुरूप स्वयं को लगातार अपडेट करना होगा।

बुधवार को एमसीयू और मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (एमपीसीएसटी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एआई फॉर मीडिया एंड कम्युनिकेशन प्रोफेशनल्स विषयक फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कुलगुरु तिवारी ने कहा कि विश्वविद्यालय ने मीडिया जगत में आने वाली प्रत्येक नई तकनीक को समय रहते अपनाया है। पाठ्यक्रमों और विषयवस्तु में भी निरंतर बदलाव किए गए हैं, ताकि विद्यार्थियों को व्यावहारिक और समकालीन शिक्षा मिल सके। उन्होंने विश्वास जताया कि यह प्रशिक्षण प्रतिभागियों और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित होगा।

मुख्य अतिथि एवं मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने कहा कि एआई जैसे समसामयिक विषय पर पाठ्यक्रम विकसित करने की दिशा में एमसीयू का प्रयास सराहनीय है। उन्होंने कहा कि यह भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया कार्य है, जिसके सकारात्मक परिणाम लंबे समय तक देखने को मिलेंगे। उन्होंने पत्रकारिता, विज्ञान संचार और एआई के क्षेत्र में एमपीसीएसटी तथा एमसीयू के बीच भविष्य में भी सहयोग जारी रहने की बात कही।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं हरियाणा के गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर उमेश आर्य ने कहा कि एआई का प्रभावी उपयोग तभी संभव है, जब उसकी मूल अवधारणा और कार्यप्रणाली की सही समझ विकसित की जाए। उन्होंने प्रतिभागियों को एआई के व्यावहारिक उपयोग और उसके सिद्धांतों से परिचित कराया। उद्घाटन सत्र के बाद अतिथियों ने विश्वविद्यालय परिसर में पौधरोपण भी किया।

एफडीपी के प्रथम तकनीकी सत्र में पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान के प्रोफेसर मुनीशचंद्र त्रिवेदी ने नई शिक्षा नीति और एआई पर व्याख्यान देते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने बताया कि बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए एआई प्लेटफॉर्म पर प्रभावी प्रॉम्प्ट तैयार करना आवश्यक है तथा शोध कार्यों में भी इसका व्यापक उपयोग हो रहा है।

दूसरे तकनीकी सत्र में प्रोफेसर उमेश आर्य ने प्रतिभागियों को विभिन्न एआई प्लेटफॉर्म पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। इस दौरान लंबी रिपोर्ट का सार तैयार करना, वीडियो का विश्लेषण, बुलेट प्वाइंट में संक्षेपण तथा दो वीडियो रिपोर्टों की तुलनात्मक समीक्षा जैसे कई अभ्यास कराए गए।

कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभागाध्यक्ष डॉ. पवित्र श्रीवास्तव ने किया। 17 जुलाई तक चलने वाले इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में मीडिया और कम्युनिकेशन क्षेत्र से जुड़े शिक्षकों, शोधार्थियों और पेशेवरों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान एआई एवं जेनरेटिव कंटेंट, मल्टीफॉर्म डेटा विश्लेषण, डीपफेक, सिंथेटिक मीडिया फोरेंसिक्स, एआई न्यूजरूम आर्किटेक्चर, एआई एथिक्स सहित कई समकालीन विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा