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सनातन धर्म के जनक हैं आदि गुरु शंकराचार्यजी : श्री महेशानंदजी महाराज

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सनातन धर्म के जनक हैं आदि गुरु शंकराचार्यजी : श्री महेशानंदजी महाराज


मंदसौर, 27 अप्रैल (हि.स.)। मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद द्वारा उत्कृष्ट विद्यालय मंदसौर में आदि गुरु शंकराचार्यजी पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महेशानंदजी महाराज मेनपुरिया ने आदि गुरु शंकराचार्यजी के जीवन, दर्शन और सनातन संस्कृति में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मात्र पांच वर्ष की आयु में संन्यास लेने वाले आदि गुरु शंकराचार्यजी ने देश के चारों दिशाओं में चार मठों की स्थापना कर भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा को मजबूत आधार दिया।

महेशानंदजी महाराज ने कहा कि अद्वैत दर्शन के माध्यम से आदि गुरु शंकराचार्यजी ने मानव जीवन को सत्य का मार्ग दिखाया। उन्होंने बताया कि ईश्वर कहीं खोया नहीं है, बल्कि वह प्रत्येक जीव और सृष्टि में विद्यमान है, उसे बाहर नहीं बल्कि अपने भीतर खोजने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर भागवताचार्य पंडित प्रियांश पुरोहित ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्यजी ने अल्पायु में पैदल देश भ्रमण कर संस्कृति को जीवित रखा और चारों दिशाओं में मठ स्थापित कर राष्ट्र को आध्यात्मिक एकता का संदेश दिया।

उत्कृष्ट विद्यालय मंदसौर के प्राचार्य रविंद्र कुमार दवे ने कहा कि उन्होंने उत्तर के मठ में दक्षिण भारत के पुजारी को स्थापित कर राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता का संदेश दिया। सीएसपी जितेंद्र सिंह भास्कर ने कहा कि हमें समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करना चाहिए तथा सनातन मूल्यों को जीवन में अपनाना चाहिए। कार्यक्रम में जिला समन्वयक तृप्ति वैरागी ने कार्यक्रम का उद्देश्य बताते हुए अतिथियों का स्वागत किया।

हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया