अनूपपुर: सोमवती अमावस्या पर अमरकंटक में उमड़ा आस्था का सैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई नर्मदा में डुबकी
अनूपपुर, 15 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में सोमवार को सोमवती अमावस्या पर मां नर्मदा की उद्गम स्थ ली अमरकंटक में प्रातः ब्रह्ममुहूर्त से श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा के पवित्र तट रामघाट, पुष्कर बांध, कोटि तीर्थ कुंड एवं आरंडी संगम पुण्य स्नान कर जप, तप, ध्यान, दान एवं पूजन-अर्चन किया तथा मां नर्मदा उद्गम मंदिर में दर्शन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य, यश एवं मंगलमय जीवन की कामना की।
वहीं, जिलेभर में सोमवती अमावस्या पर सुहागिनें पीपल के वृक्ष में जल अर्पित कर मौली (कलावा) लपेटकर 108 बार परिक्रमा कर पति की लम्बीप आयु के लिए प्रार्थना की। हिंदू धर्म में इस तिथि को अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना गया है, जो मुख्य रूप से पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि, पितरों के तर्पण, और पवित्र नदियों में स्नान-दान के लिए समर्पित है।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार की सोमवती अमावस्या अनेक शुभ संयोगों से युक्त रही। लगभग 30 वर्षों के पश्चात पुरुषोत्तम (अधिक) मास में सोमवती अमावस्या का संयोग प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही पुरुषोत्तम मास के समापन दिवस पर मिथुन संक्रांति का योग बनने से इस पर्व का महत्व और अधिक बढ़ गया। शास्त्रों में अमावस्या एवं संक्रांति के एक साथ होने को विषु संक्रांति कहा गया है, जो मेष और तुला संक्रांति के समान तथा ग्रहणकाल के तुल्य पुण्यदायी मानी जाती है।
धर्माचार्यों का कहना है कि इस विशेष अवसर पर किया गया स्नान, जप, तप, दान, हवन, पूजन एवं दीपदान अक्षय फल प्रदान करने वाला होता है। मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन श्रद्धा एवं भक्ति से किए गए धार्मिक अनुष्ठानों का पुण्य समस्त तीर्थों में किए गए पुण्य कर्मों के समान फलदायी होता है। यही कारण रहा कि अमरकंटक में प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और लोगों ने मां नर्मदा के पवित्र जल में स्नान कर धर्मलाभ अर्जित किया।
पर्व के अवसर पर अनेक श्रद्धालुओं ने सूर्योदय से पूर्व स्नान कर सूर्य नारायण को अर्घ्य अर्पित किया तथा अपने इष्टदेव का पूजन एवं मंत्र जाप किया। कई स्थानों पर हवन-पूजन के धार्मिक आयोजन भी संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने पीपल के समीप दीपदान कर भगवान विष्णु एवं मां नर्मदा का स्मरण किया। इसके साथ ही अन्नदान, वस्त्रदान, गौसेवा तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता कर पुण्य अर्जित किया।
सौभाग्यवती महिलाओं ने किया वट एवं पीपल पूजन
सोमवती अमावस्या के अवसर पर पूरे जिले भर में सौभाग्यवती महिलाओं ने अपने नजदीक के पीपल के वृक्ष में श्रद्धाभाव से 108 परिक्रमा लगाकर व्रत एवं पूजन संपन्न किया। अमरकंटक में नर्मदा मंदिर परिसर, रामघाट एवं आसपास स्थित पीपल तथा वट वृक्षों का विधिवत पूजन किया। महिलाओं ने कच्चे धागे से वृक्षों की परिक्रमा कर अपने पति एवं परिवारजनों के दीर्घायु, स्वस्थ एवं सुखमय जीवन की कामना की। अनेक महिलाओं ने श्रद्धाभाव से 108 परिक्रमा लगाकर व्रत एवं पूजन संपन्न किया।
लगभग एक माह तक चले पुरुषोत्तम मास के दौरान अमरकंटक में धार्मिकता का विशेष वातावरण बना रहा। देश के विभिन्न राज्यों राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश से आए श्रद्धालुओं ने विभिन्न आश्रमों में आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रमों में भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित किया। कल्याण सेवा आश्रम, मृत्युंजय आश्रम, शांतिकुंज आश्रम, बर्फानी आश्रम, मार्कण्डेय आश्रम, धारकुंडी आश्रम तथा गुरु नानक गुरुद्वारा सहित अनेक धार्मिक संस्थानों में शिव महापुराण, श्रीमद्भागवत महापुराण एवं नर्मदा महापुराण कथा का भव्य आयोजन हुआ।
श्रद्धा, आस्था और सनातन का अद्भुत संगम
इस प्रकार विषु संक्रांति, मिथुन संक्रांति, पुरुषोत्तम मास और सोमवती अमावस्या के दुर्लभ महासंयोग ने अमरकंटक में श्रद्धा, आस्था और सनातन संस्कृति की दिव्यता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। मां नर्मदा के चरणों में उमड़ी श्रद्धा की यह विशाल धारा जनमानस की अटूट आस्था और भारतीय धार्मिक परंपराओं की जीवंतता का प्रतीक बनी रही।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

