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भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक पर मंदसौर में निकला भव्य वरघोड़ा, नौ रथों में विराजित हुईं प्रतिमाएं

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भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक पर मंदसौर में निकला भव्य वरघोड़ा, नौ रथों में विराजित हुईं प्रतिमाएं


मंदसौर, 20 अगस्त (हि.स.)। भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक दिवस के अवसर पर गुरुवार को श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ के तत्वावधान में मंदसौर में भव्य चल समारोह (वरघोड़ा) निकाला गया। नगर के नौ श्वेतांबर जैन मंदिरों की प्रतिमाओं को नौ रथों में विराजित कर निकाले गए इस धार्मिक जुलूस में बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। इसके बाद श्री रुद्राक्ष माहेश्वरी भवन में गुणानुवाद सभा एवं धर्मसभा का आयोजन किया गया।

वरघोड़े की शुरुआत नई आबादी स्थित आराधना भवन जैन मंदिर से हुई। इसके बाद चल समारोह गुरुद्वारा रोड, महू-नीमच रोड, गोल चौराहा और नयापुरा रोड होते हुए श्री रुद्राक्ष माहेश्वरी भवन पहुंचा। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर भगवान पार्श्वनाथ के रथों की गहुली कर श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था प्रकट की।

चल समारोह से पहले श्री सहस्त्रफणा पार्श्वनाथ जैन मंदिर में बोली के लाभार्थी धर्म मनसुखलाल एवं अमित कुमार मारवाड़ी परिवार की ओर से भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा पर निर्वाण लड्डू अर्पित किया गया। लाभार्थी परिवार ने श्री श्रेयांसनाथ जैन मंदिर, नई आबादी तथा आदिनाथ मंदिर, नयापुरा रोड पर भी भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा पर निर्वाण लड्डू चढ़ाया।

तीनों मंदिरों में मंदिर ट्रस्टियों और श्री संघ की ओर से श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ के अध्यक्ष संजय जैन श्वेता तथा संयोजक सुरेंद्र लोढ़ा का माला पहनाकर एवं तिलक लगाकर स्वागत किया गया।

वरघोड़े में नगर के विभिन्न जैन श्री संघों के महिला मंडलों की सदस्याएं पारंपरिक परिधानों में शामिल हुईं। आराधना भवन महिला मंडल की सदस्यों ने भगवान पार्श्वनाथ के 108 मंदिरों के चित्र हाथों में धारण किए। अन्य महिला मंडलों की सदस्याओं ने जैन तीर्थंकरों के प्रतीक चिह्न लेकर चल समारोह की शोभा बढ़ाई।

वरघोड़े के बाद माहेश्वरी भवन में आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री अशोकसागरजी महाराज साहब की प्रेरणा से आर्यरक्षित तीर्थ में चातुर्मास कर रहे आचार्य श्री सागरचन्द्र सागर जी, आचार्य श्री सौम्यचन्द्र सागर जी, आचार्य श्री विवेकचन्द्र सागर जी और आचार्य तीर्थरत्न सागर जी शामिल हुए। इसके अलावा आराधना भवन में चातुर्मास कर रहे श्री विरल विजय जी तथा राजेंद्र विलास में चातुर्मास कर रहे आचार्य श्री प्रत्यक्ष रत्न विजय जी महाराज साहब सहित साध्वीगण भी धर्मसभा में उपस्थित रहे।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री सागरचन्द्र सागर जी महाराज ने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ का संपूर्ण जीवन मानव समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि अपने द्वेष पर विजय प्राप्त कर मोक्ष की ओर बढ़ने की प्रेरणा भगवान पार्श्वनाथ के जीवन से मिलती है।

उन्होंने कहा कि कमठ ने आठ भवों तक भगवान पार्श्वनाथ से बैर रखा और प्रत्येक भव में उन्हें उपसर्ग दिया, लेकिन भगवान पार्श्वनाथ ने हमेशा समता का भाव बनाए रखा और शत्रुता रखने वाले कमठ के प्रति भी बैर नहीं रखा। इसी समता भाव के कारण उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। उन्होंने समाजजनों से जीवन में भी इसी प्रकार समता का भाव अपनाने का आह्वान किया।

धर्मसभा में विरल विजयजी और श्री प्रत्यक्षरत्न विजयजी महाराज साहब ने भी अपने विचार रखे। संघ अध्यक्ष संजय जैन श्वेता ने स्वागत उद्बोधन दिया, जबकि संघ संयोजक सुरेंद्र लोढ़ा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन अमित जैन छिंगावत ने किया और आभार सुनील बालावत ने व्यक्त किया।

कार्यक्रम के दौरान तमिलनाडु से प्राप्त दिव्य एवं अलौकिक प्रतिमा का अभिषेक भी किया गया। बताया गया कि मुंगा पत्थर से निर्मित यह प्रतिमा पानी में तैरती है। प्रतिमा के अभिषेक की बोली के लाभार्थी मनसुखलाल एवं अमित कुमार मारवाड़ी परिवार ने संघ और जैन समाज के वरिष्ठजनों के साथ पंचामृत से प्रतिमा का अभिषेक किया।

हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया