मंदसौरः श्री आर्यरक्षित तीर्थ धाम पर भव्य अनुष्ठान कार्यक्रम का हुआ आयोजन
मंदसौर , 04 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मंदसौर में रविवार को आचार्य अशोक सागरसूरीश्वरजी म. सा., आचार्य सागरचन्द्र सागरसूरीश्वरजी क. सा. की पावन प्रेरणा व निश्रा में जैन भागवती सूत्र के योगोद्वहन प्रवेश का भव्य अनुष्ठान - कार्यक्रम आयोजित किया गया।
36 वर्ष पूर्व संयम जीवन ग्रहण करने वाले प्रवर्तक मुनिश्री धैर्यचन्द्र सागरजी म. सा. जैन भागवती सूत्र शास्त्र जिसमें 36 हजार प्रश्नोत्तर है। उसका वाचन करने की पात्रता प्राप्त करने हेतु निरंतर 6 माह तक आयंबिल तप की आराधना करते हुए प्रतिदिन धार्मिक क्रियाये करेंगे।
प्रवर्तक धैर्यचन्द्रसागरजी म. सा. को उक्त शास्त्र वाचन करने की जैन धर्म व दर्शन में जो पात्रता बतायी है उसे ही योगोद्वहन कहते है। इस कार्यक्रम के निमित्त पुरे तीर्थ क्षेत्र में रंग बिरंगों रंगों से रंगोली सजायी गयी। प्रवचन मंडप की विशेष साज सज्जा की गयी। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष मुकेश खमेसरा ने 21 प्रकार की सब्जियों व फलों से जीव दया रंगोली तैयार की जो कार्यक्रम के आकर्षण का केन्द्र बनी।
प. पू. जैन आचार्य सागरचन्द्र सागरजी म. सा. ने कहा कि 45 जैन आगमो में भगवती सूत्र सबसे बड़ा आगम (शास्त्र) है। यह शास्त्र प्राकृत व संस्कृत के मेल से बनी अर्द्ध मागधी भाषा में है। इसमें 36 हजार प्रश्न व 36 हजार उनके उत्तर है। जैन धर्म व दर्शन में कोई साधारण गृहस्थ या साधु - साध्वी इस शास्त्र का वाचन नहीं करता है। इस शास्त्र के वाचन के लिये साधु - साध्वी के लिये 6 माह की क्रियाये बतायी है। प्रतिदिन 6 माह तक केवल एक समय समय स्वाद रहित आहार (आम्बिल) करते हुए 6 माह तक धार्मिक क्रियाये करना जरूरी है।
रूपचांद आराधना भवन (केशरिया आदिनाथ संघ) की चैत्य परिपाटी निकली- आचार्य सागरचन्द्रसूरीश्वरजी म. सा. सहित 6 जैनाचार्याे के दर्शन वंदन एवं संवत्सरी क्षमापना करने हेतु चौधरी कॉलोनी स्थित रूपचांद आराधना भवन से केसरिया आदिनाथ संघ की चैत्य परिपाटी निकाली गयी। बैंड बाजे के साथ निकले इस चैत्य परिपाटी में श्रीसंघ से जुड़े परिवार शामिल हुए।
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हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया

