फसल अवशेष से कमाई का नया मॉडल: मंदसौर के कृषक ने बदली खेती की तस्वीर
मंदसौर, 02 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम कनघट्टी के प्रगतिशील किसान राजेश आर्य ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर खेती में नवाचार की मिसाल पेश की है। उन्होंने न केवल अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का मार्ग प्रशस्त किया है।
कृषि अभियांत्रिकी विभाग की ई-कृषि यंत्र अनुदान योजना के तहत राजेश आर्य ने स्ट्रॉ रीपर मशीन खरीदी, जिस पर उन्हें लगभग 1.50 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। इस मशीन की मदद से वे गेहूं की कटाई के बाद खेतों में बचे फसल अवशेष (नरवाई) को प्रभावी ढंग से भूसे में परिवर्तित कर रहे हैं।
जहां पहले किसान नरवाई जलाने के लिए मजबूर होते थे, वहीं अब इस पहल ने समस्या को समाधान में बदल दिया है। राजेश आर्य गांव और आसपास के क्षेत्रों में किसानों के खेतों से हार्वेस्टर के बाद बचे अवशेषों को नि:शुल्क साफ कर स्ट्रॉ रीपर के माध्यम से भूसा तैयार करते हैं। खास बात यह है कि एक ट्रॉली भूसा तैयार होने पर लगभग 10 से 15 किलोग्राम गेहूं भी निकलता है, जिसे वे संबंधित किसान को वापस लौटा देते हैं।
इस पहल से किसानों को कई फायदे मिल रहे हैं—खेत साफ करने की चिंता से मुक्ति, अतिरिक्त गेहूं की प्राप्ति, भूसे के उपयोग और बिक्री से आय, नरवाई जलाने की जरूरत खत्म होने से पर्यावरण संरक्षण, और मृदा स्वास्थ्य में सुधार।
राजेश आर्य द्वारा तैयार किया गया भूसा स्थानीय गौशालाओं में बेचा जा रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है। उनकी यह पहल दर्शाती है कि आधुनिक तकनीक और नवाचार के जरिए किसान न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया

