अनूपपुर : केवई नदी बचाने के लिए निर्णायक जंग, 13 मई को चंगेरी में होगा जल सत्याग्रह
अनूपपुर, 11 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के कोतमा क्षेत्र की जीवनदायिनी मानी जाने वाली केवई नदी को बचाने की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। नदी में हो रहे कथित अवैध उत्खनन और प्रस्तावित बैराज निर्माण के विरोध में 13 मई को चंगेरी में जल सत्याग्रह आयोजित किया जाएगा।
इस आंदोलन को लेकर क्षेत्र के युवाओं, समाजसेवियों और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। जिसे लेकर सोमवार को समाजसेवी अनुज गौतम सहित कोतमा नगर के लोगो ने एसडीएम कोतमा को ज्ञापन सौप कर चेतावनी दी है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि केवई नदी केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि हजारों लोगों की आजीविका का आधार है। इसके बावजूद लगातार अवैध उत्खनन और बिना पारदर्शिता के बैराज निर्माण की प्रक्रिया से नदी के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन और संबंधित कंपनी की मिलीभगत से नदी और पर्यावरण के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
क्षेत्रवासियों के न्याय के लिए होगा जल सत्याग्रह
समाजसेवी अनुज गौतम ने बताया कि 13 मई को प्रस्तावित जल सत्याग्रह के माध्यम से आंदोलनकारी अवैध उत्खनन पर तत्काल रोक, प्रस्तावित बैराज निर्माण को निरस्त करने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। स्थानीय युवाओं का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में कोतमा विधानसभा क्षेत्र के हजारों परिवार जल संकट और रोजगार संकट से प्रभावित होंगे। नदी पर निर्भर मछुआरे, किसान और अन्य वर्गों के सामने गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।
आंदोलन को मिल रहा व्यापक समर्थन
अनुज गौतम ने बताया कि जल सत्याग्रह को लेकर क्षेत्र में लगातार जनसमर्थन बढ़ रहा है। बड़ी संख्या में लोगों के चंगेरी पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। आयोजकों ने इसे “नदी बचाओ, भविष्य बचाओ” की लड़ाई बताते हुए सभी वर्गों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। आंदोलनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल सत्याग्रह के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

