सीहोरः शुक्रवार को सजेगी कृष्ण-रुक्मिणी विवाह की मनोहारी झांकी, कथा में गूंजा गौ सेवा का संदेश
सीहोर, 24 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सीहोर शहर के बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल धर्मशाला में अग्रवाल महिला मंडल के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन गुरुवार को नंद महोत्सव और गोवर्धन पूजन श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कथा प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को गौ सेवा, दान, सत्संग और हरिनाम स्मरण का महत्व बताया। शुक्रवार को कथा के छठवें दिन भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह उत्सव की आकर्षक झांकी सजाई जाएगी। साथ ही तुलसी विवाह के धार्मिक महत्व का वर्णन किया जाएगा।
कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि गौ सेवा को धर्मग्रंथों में श्रेष्ठ पुण्य कर्म माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गौ माता में देवी-देवताओं का वास माना जाता है तथा उनके शरीर में मां लक्ष्मी और मां गंगा का निवास बताया गया है। ऐसे में गौ माता की सेवा भगवान की आराधना के समान है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धन पूजन का प्रसंग पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है। प्रकृति और पर्यावरण के प्रति मनुष्य का दायित्व समझना जरूरी है। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में ऐसे संदेशों को पहुंचाने का प्रयास होना चाहिए।
दान से धन, स्नान से तन और हरिनाम से मन की शुद्धि
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि निरंतर भक्ति मनुष्य को परमात्मा के करीब ले जाती है। ईश्वर की प्राप्ति के लिए अच्छे विचार, सादगी और सत्कर्म आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि दान करने वाला व्यक्ति महान होता है। दान से धन की शुद्धि, स्नान से तन की शुद्धि और हरिनाम के स्मरण से मन की शुद्धि होती है।
उन्होंने कहा कि सत्संग मनुष्य के जीवन को श्रेष्ठ बनाने का माध्यम है, लेकिन आधुनिक जीवनशैली में व्यक्ति धीरे-धीरे सत्संग से दूर होता जा रहा है। मोह-माया और ऐश्वर्य के पीछे भागते हुए मनुष्य स्वयं को भूलता जा रहा है। इसके कारण जीवन में अशांति और दुख बढ़ रहे हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से सत्संग और सद्कर्मों से जुड़े रहने का आह्वान किया।
शिव को बताया सनातन धर्म का मूल आधार
कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने भगवान शिव के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान की कृपा और करुणा के बिना सच्ची भक्ति की प्राप्ति संभव नहीं है। भगवान शिव और श्रीकृष्ण प्रत्येक जीव के रोम-रोम में विद्यमान हैं। परमात्मा हमारी धड़कन में हैं और शिव हमारी दृष्टि में हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक शरीर में सांस चलती है, तब तक जीवन है और जब सांस रूपी शिव शरीर से चले जाते हैं तो शरीर शव बन जाता है। शिव ही प्रथम हैं और शिव ही अंतिम हैं। पंडित मिश्रा ने कहा कि शिव सनातन धर्म के मूल आधार हैं। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति भी शिव की शरण से होती है। समस्त जगत शिव की शरण में है और धर्मग्रंथों में भी शिव के प्रति समर्पण को जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है।
बाल लीलाओं के प्रसंग पर भक्तिभाव में डूबे श्रद्धालु
भागवत कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया गया। भगवान की बाल लीलाओं के प्रसंग सुनकर कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भक्तिभाव में डूबे रहे। नंद महोत्सव और गोवर्धन पूजन के अवसर पर श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
इस अवसर पर भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया गया और इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की गई। कथा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। नंद महोत्सव, गोवर्धन पूजन और भगवान की बाल लीलाओं के प्रसंगों से पूरा वातावरण धार्मिक उल्लास और भक्ति से सराबोर रहा।
शुक्रवार को कथा के छठवें दिन भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह उत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर विवाह प्रसंग पर आधारित आकर्षक झांकी सजाई जाएगी। इसके साथ ही कथा वाचक तुलसी विवाह के धार्मिक महत्व और उससे जुड़े प्रसंगों का वर्णन करेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

