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अनूपपुर: पटवारियों की हड़ताल का 14वां दिन: 9 और पटवारी निलंबित, अब तक 18 निलंबित

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अनूपपुर: पटवारियों की हड़ताल का 14वां दिन: 9 और पटवारी निलंबित, अब तक 18 निलंबित


अनूपपुर: पटवारियों की हड़ताल का 14वां दिन: 9 और पटवारी निलंबित, अब तक 18 निलंबित


अनूपपुर, 25 फ़रवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिला प्रशासन ने बुधवार को हड़ताल कर रहे 9 और पटवारियों को अनाधिकृत अनुपस्थिति और फार्मर रजिस्ट्री में लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही, पिछले 14 दिनों से जारी पटवारियों की हड़ताल के दौरान अब तक कुल 18 पटवारियों को निलंबित किया जा चुका है।

मध्य प्रदेश पटवारी संघ जिला इकाई अनूपपुर अपनी 10 सूत्रीय मांगों, जिनमें वेतन भुगतान और अन्य लंबित मांगें शामिल हैं, को लेकर पिछले 14 दिनों से कलमबंद हड़ताल पर है। मंगलवार शाम को जिला प्रशासन ने धरना स्थल को अवैधानिक घोषित करते हुए टेंट हटवा दिया था और स्थल खाली करवा लिया था। इस फैसले पर जिला प्रशासन को धन्यवाद ज्ञापित का गुलाब का फूल सौंपा।

निलंबन के विरोध में मध्य प्रदेश पटवारी संघ जिला इकाई अनूपपुर के सभी पटवारी बुधवार को आदिवासी विभाग कार्यालय परिसर स्थित शिव मंदिर स्थल पर जिला प्रशासन के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। जिला अध्यक्ष चेतन सिंह मरावी ने प्रशासन की कार्रवाई को द्वेषपूर्ण बताया और कहा कि यह पटवारियों को परेशान करने की नीयत से की गई है। उन्होंने घोषणा की कि मांगें पूरी न होने तक हड़ताल जारी रहेगी।

जिला प्रशासन को गुलाब फूल देकर कहा धन्यवाद

पटवारी संघ के पदाधिकारीयो ने आज आंदोलन स्थल से टेंट हटवाने के फैसले पर जिला प्रशासन को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए अपर कलेक्टर दिलीप कुमार पांडे को गुलाब का फूल देकर अभार जताया। इस दौरान उन्होंने कहा कि वह अपनी जायज मांग को लेकर के प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन प्रशासन आंदोलन को समाप्त करने दमनकारी नीति अपना रहा है। इसके विरोध में अब प्रदेश स्तर पर आंदोलन की चेतावनी पटवारी संघ ने दी है।

पटवारी संघ शाम को धरना परिसर में बीएमएस और राज्य कर्मचारी संघ के समर्थन के साथ रैली निकालेगा और ज्ञापन सौंपेगा। पटवारियों ने यह भी कहा है कि वे 26 फरवरी से बोर्ड परीक्षा के लिए नियुक्त कलेक्टर प्रतिनिधि के रूप में कार्य नहीं करेंगे। अनूपपुर के पटवारियों के समर्थन में प्रदेश स्तर से अन्य जिलों के पटवारी संघ 27 फरवरी को अनूपपुर पहुंचकर विरोध जताएंगे। इससे प्रशासन की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं।

एक ओर जहां पटवारी अपनी मांगों को लकर हडताल पर हैं वहीं दूसरी ओर इस हडताल से आम जनता परेशान है। 12 फरवरी से पटवारियों की हड़ताल लगातार जारी है। शासन -प्रशासन की समझाईश, नोटिस, कार्यवाही का कोई असर पटवारियों पर नहीं दिख रहा है। स्थिति इतनी खराब है कि तहसीलों और एसडीएम कार्यालयों मे भूमि और राजस्व से जुडे कार्य बिल्कुल ठप्प है। भूमि, नक्शा तरमीम , सीमांकन, बंटवारा, फार्मर आईडी, ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र सहित अन्य कार्य नहीं होने से किसान, जमीन मालिक, हितग्राही, छात्र-छात्राएं परेशान हैं।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना फार्मर रजिस्ट्री बकटिंग का लक्ष्य प्रदेश मे निचले स्तर पर है। अनूपपु्र जिला निचले स्तर मे 13वें नम्बर पर है और केवल 26 प्रतिशत कार्य ही किया गया है। जबकि प्रमुख सचिव राजस्व म.प्र शासन के निर्देशानुसार फार्मर रजिस्ट्री करा कार्य (भूमिस्वामीवार) शीघ्र पूर्ण किये जाने के निर्देश हैं। फार्मर रजिस्ट्री नैचुरशन कार्य में प्रदेश स्तर पर अनूपपुर जिले की प्रगति अति निम्न है। 30 जनवरी 2026 को आयोजित पटवारियो की बैठक में फार्मर रजिस्ट्री कार्य की समीक्षा कर कार्य पूर्ण करने हेतु निर्देश कलेक्टर हर्षल पंचोली ने दिये थे। वांछित प्रगति न होने की दशा में 03 फरवरी को पटवारियों का माह जनवरी का वेतन रोका दिया गया। जाहिर है कि लक्ष्यपरक कार्य समय पर पूर्ण ना होने से प्रदेश मे अनूपपुर जिले की किरकिरी हो रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कलेक्टर हर्षल पंचोली के आदेशानुसार तहसील स्तर पर पदस्थ पटवारी, जिन्होने अपने प्रभार के किसी भी एक ग्राम में 30 प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री बकटिंग का कार्य पूर्ण कर लिया हो, उन पटवारियों का वेतन आहरण की अनुमति प्रदान की गयी है। शेष ऐसे पटवारी जिन्होने अपने प्रभार के किसी भी ग्राम में 30 प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री बकटिंग कार्य पूर्ण नही किया है उनका वेतन आहरण प्रतिबंधित रहेगा। इससे साफ जाहिर है कि पटवारी अपने काम के प्रति गंभीर नहीं है, उन पर कलेक्टर के आदेश का कोई असर नहीं हो रहा है। इससे जिले भर मे यह संदेश जा रहा है कि पटवारी जिला प्रशासन को संगठन के दबाव मे काम करने के लिये मजबूर करना चाह रहे हैं। लोकतंत्र मे हडताल, धरना प्रदर्शन करने का सबको अधिकार है । लेकिन कलेक्टर सहित अपने अधिकारियों के आदेश/निर्देशों की अवहेलना करना, कार्य ना करना और हडताल के माध्यम से दबाव बनाना उचित नहीं कहा जा सकता।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला