धर्मांतरण निषेध कानून रद्द न करे कर्नाटक सरकार: विश्व हिंदू परिषद
बेंगलुरु, 07 नवंबर (हि.स.)। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की कर्नाटक दक्षिण इकाई ने राज्य सरकार से कर्नाटक धार्मिक स्वतंत्रता संरक्षण अधिनियम-2022 (धर्मांतरण निषेध कानून) को किसी भी परिस्थिति में रद्द या कमजोर नहीं करने की मांग की है। इस संबंध में परिषद ने राज्य के मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। विहिप कर्नाटक के प्रांत सचिव बी.ई. सुरेश ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि आर्कबिशप पीटर मचाडो सहित कुछ हितधारकों की ओर से इस कानून को रद्द करने की मांग की जा रही है। परिषद ने राज्य सरकार से ऐसी मांगों को स्पष्ट रूप से खारिज करने का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा कि यह कानून किसी विशेष धर्म को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि बलपूर्वक, धोखाधड़ी, प्रलोभन या गुमराह करके किए जाने वाले अवैध धर्मांतरण को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया है। विहिप ने सवाल उठाया है कि ऐसे गैरकानूनी कृत्यों पर रोक लगाने वाले कानून का विरोध क्यों किया जा रहा है।
अपने पत्र में परिषद ने कहा है कि धर्मांतरण निषेध कानून को केवल राजनीतिक नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने वर्ष 2006 में कड़ा धर्मांतरण निषेध कानून बनाया था। इसी तरह अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में भी विभिन्न सरकारों ने ऐसे कानूनों को जारी रखा है। परिषद ने कहा कि समाज में शांति और व्यवस्था बनाए रखना किसी भी राजनीतिक दल के चुनावी घोषणापत्र से परे सरकार का स्थायी दायित्व है।
विहिप ने वर्ष 1977 के चर्चित 'रेवरेंड स्टेनिस्लॉस बनाम मध्य प्रदेश सरकार' मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले का भी उल्लेख किया है। परिषद के अनुसार, न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धर्म के प्रचार का अधिकार किसी अन्य व्यक्ति का जबरन धर्मांतरण कराने का अधिकार नहीं देता।
विश्व हिन्दू परिषद ने कहा कि राजनीतिक दलों के चुनावी घोषणापत्र अंतिम नहीं होते और उन्हें कोई वैधानिक सर्वोच्चता प्राप्त नहीं है। सरकार को संविधान और कानून के दायरे में रहकर निर्णय लेना चाहिए। केवल चुनावी वादों को पूरा करने के लिए ऐसे फैसले नहीं किए जाने चाहिए, जिनसे सामाजिक शांति प्रभावित हो।
विहिप ने कर्नाटक की सांस्कृतिक विशिष्टता और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने का हवाला देते हुए आर्कबिशप पीटर मचाडो और उनके समूह की मांगों को तत्काल खारिज करने का आग्रह किया है। साथ ही परिषद ने कर्नाटक धार्मिक स्वतंत्रता संरक्षण अधिनियम-2022 और कर्नाटक गोहत्या रोकथाम एवं पशु संरक्षण अधिनियम-2020 को राज्य में सख्ती से लागू करने की मांग की है।-----------
हिन्दुस्थान समाचार / राकेश एम.बी.

