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कर्नाटक के होटलों को फिलहाल गैस आपूर्ति संभव नहीं: के.एच. मुनियप्पा

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कर्नाटक के होटलों को फिलहाल गैस आपूर्ति संभव नहीं: के.एच. मुनियप्पा


बेंगलुरु, 16 मार्च (हि.स.)। पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न एलपीजी संकट का असर अब कर्नाटक के होटल उद्योग पर भी पड़ने लगा है। राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री के. एच. मुनियप्पा ने कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में राज्य के होटलों को पूरी तरह गैस आपूर्ति करना फिलहाल संभव नहीं है।

बेंगलुरु में तेल आपूर्ति कंपनियों के साथ हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में मंत्री ने बताया कि स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को दूसरा पत्र भेजने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि स्थिति गंभीर है और केंद्र सरकार को इस मामले पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

मंत्री ने के. एच. मुनियप्पा ने बताया कि इस संबंध में राज्य के मुख्य सचिव, संबंधित आयुक्तों और तेल कंपनियों के प्रमुखों के साथ करीब एक घंटे तक बैठक हुई। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे अनावश्यक घबराहट से बचें, गैस की डबल बुकिंग न करें और एलपीजी का सीमित उपयोग करें।

उन्होंने कहा कि गैस ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही शुरू हो चुकी है और आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, एयरलाइंस तथा रेलवे कैंटीन को 100 प्रतिशत सिलेंडर उपलब्ध कराने पर सहमति बनी है।

मंत्री के अनुसार, केंद्र सरकार ने प्रतिदिन लगभग 9,500 सिलेंडर की आपूर्ति की अनुमति दी है। इसमें से 4,200 सिलेंडर आवश्यक सेवाओं के लिए दिए जाएंगे। अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और इंदिरा कैंटीन के लिए 4,200 सिलेंडर के साथ अतिरिक्त 1,200 सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे। आवश्यक सेवा क्षेत्रों को कुल 5,200 सिलेंडर तथा ऑटो चालकों को लगभग 2,250 सिलेंडर की आपूर्ति जारी रखी जाएगी।

हालांकि, फिलहाल होटलों को एलपीजी आपूर्ति संभव नहीं होगी। ऐसे में होटल संचालकों से आवश्यकता पड़ने पर इलेक्ट्रिक स्टोव का उपयोग करने की अपील की गई है।

मंत्री मुनियप्पा ने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में राज्य में होटलों को प्रतिदिन लगभग 44,000 एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति की जाती थी। स्थिति सामान्य होने के बाद होटल क्षेत्र को गैस आपूर्ति फिर से शुरू की जा सकती है।-----------------

हिन्दुस्थान समाचार / राकेश महादेवप्पा