home page

अपने भीतर संस्कारों के दीप जलाइए, बाहर का अंधकार अपने आप मिट जाएगा : मुनीश्री

 | 
अपने भीतर संस्कारों के दीप जलाइए, बाहर का अंधकार अपने आप मिट जाएगा : मुनीश्री


रांची, 04 अप्रैल (हि.स.)। बिरसा मुंडा फन पार्क में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के चौथे दिन शनिवार को तप कल्याणक का आयोजन अत्यंत श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। प्रातः 06 बजे से अभिषेक नित्य पूजन के बाद तप और दीक्षा कल्याणक की क्रिया के बाद पुनः दोपहर 12 बजे तप कल्याणक के अन्तर्गत नाभिराय का दरबार, राज्याभिषेक, षट्कर्म उपदेश, महाराजा आदिकुमार का वैराग्य एवं दीक्षा विधि पूर्ण की गई।

इस दौरान मुनिश्री 108 प्रमाण सागरजी महाराज का प्रवचन हुआ जिसमें उन्होंने जीवन की सार्थकता, आत्म-जागरण और विचार-शुद्धि पर विस्तृत एवं प्रेरणादायक मार्गदर्शन दिया।

उन्होंने कहा कि मनुष्य बाहर की परिस्थितियों को बदलने में जितना प्रयास करता है, यदि उतना ही अपने मन, विचार और स्वभाव को बदलने में करे तो जीवन स्वतः ही शांत, सुव्यवस्थित और सफल बन जाता है।

उन्होंाने कहा कि अपने जीवन में त्याग को जीवन का आदर्श बनाकर त्यागियों के अनुगामी बनना चाहिए। त्यागियों का अनुगामी बनने का अर्थ उनके पीछे चलना नहीं बल्कि उनकी शक्तियों का अनुशरण करना है। मुनीश्री ने कहा कि चिंतन, मनन, प्रवचन बहुत हुआ अब कुछ करिए और आगे बढ़िये। आवरण के सामने ही प्राय नयन नम जाती है और आचरण के सामने आते ही प्राय: कदम थम जाता है। धन की रक्षा में प्रवेश करने वाले को सबसे प्रथम कार्य है कुलाचर का पालन (कुलाचर का मतलब हमारे कुल कामागत जो संस्कार है उनका दृढ़ता से अनुपालन) करना है।

हम भाग्यशाली हैं कि हमारे कुल में पीढ़ियों से हिंसा नहीं हुई

मुनीश्री ने कहा कि अभक्ष्य का परहेज सात्विक का पालन अपनी खानपान प्रवृत्तियों में दया का पालन यह आपका कूलाचार है जो हमें घुटियों के संस्कार में मिला, हम भाग्यशाली हैं कि हमारा जन्म ऐसी कुल में हुआ जहां पीढ़ियों से हिंसा और हत्याएं नहीं हुईं हैं। खोज किया जाए तो हमारे डीएनए में अहिंसा है। अपेक्षाओं का बोझ मनुष्य को थका देता है। जितनी कम अपेक्षाएं, उतनी अधिक शांति। कर्म से पहले विचार आता है।

यदि विचार श्रेष्ठ होंगे, तो कर्म अपने आप श्रेष्ठ बन जाएंगे। अहिंसा केवल शारीरिक न हो, वाणी और विचार की अहिंसा उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। अपने भीतर दीप जलाइए, बाहर का अंधकार अपने आप मिट जाएगा। मनुष्य के आचरण का पता उसके कुल से लग जाता है।

इधर, मध्याह्न में आदि कुमार की बारात के साथ वैराग्य और दीक्षा विधि सम्पन्न हुई। संध्या में सांस्कृतिक कार्यक्रम में तप और दीक्षा का चित्रण किया गया। जिस तरह की विधि संस्कार पूजन के माध्यम से पंडाल में हुआ।

इसके बाद मुनिश्री मंदिर गए जहां विधी को संपन्न किया गया। गृह त्याग, वस्त्र त्याग, केश लोचन सभी प्रक्रिया की गई। रांची के अलावा पूरे भारत के कई स्थानों से लोग पहुंचे। रविवार को मुनिश्री के सानिध्य में भावना योग के फायदे और इसे कैसे अपने जीवन में अपनाकर दैनिक क्रियाओं में शामिल करें इसके लिए मार्गदर्शक किया जाएगा।

मौके पर समाज के मंत्री जीतेन्द्र छाबड़ा और अध्यक्ष प्रदीप बाकलीवाल ने सभी धर्म के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak