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कचरे में तब्दील हुई कचरा प्रबंधन योजना, करोड़ों के संसाधन पड़े बेकार

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कचरे में तब्दील हुई कचरा प्रबंधन योजना, करोड़ों के संसाधन पड़े बेकार


देवघर, 07 अप्रैल (हि.स.)। मधुपुर नगर परिषद की डोर-टू-डोर कचरा उठाव योजना आज खुद अव्यवस्था का शिकार बनती नजर आ रही है। शहर के 23 वार्डों में शुरू की गई यह महत्वाकांक्षी योजना अब लगभग ठप स्थिति में पहुंच चुकी है। योजना का उद्देश्य घर-घर से सूखा और गीला कचरा अलग-अलग संग्रह कर स्वच्छ शहर की दिशा में ठोस कदम उठाना था, लेकिन शुरुआती महीनों के बाद व्यवस्था धीरे-धीरे कमजोर पड़ती चली गई।

योजना के तहत प्रत्येक वार्ड के लिए लगभग 10 लाख रुपये की लागत से ऑटो टीपर वाहन उपलब्ध कराए गए थे। वर्तमान स्थिति यह है कि 23 में से 18 वाहन खराब होकर वार्ड विकास केंद्र तिलैयाटांड़ और बरसतिया स्थित डंपिंग स्थल पर बेकार पड़े हैं। नियमित देखरेख और समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण ये वाहन अब कबाड़ में तब्दील होते जा रहे हैं।

इसी योजना के अंतर्गत पिछले वर्ष 250 स्टील डस्टबिन खरीदे गए थे, जिनका उपयोग सूखा और गीला कचरा अलग रखने के लिए किया जाना था, लेकिन अधिकांश डस्टबिन क्षतिग्रस्त होकर अनुपयोगी हो चुके हैं। वहीं बड़बाद में प्रस्तावित कचरा प्रबंधन प्लांट अब तक शुरू नहीं हो पाया है, क्योंकि पर्यावरण विभाग सहित आवश्यक एनओसी लंबित है।

कचरा उठाव करने वाली एजेंसी को शुरुआत में प्रति मीट्रिक टन 2502 रुपये का भुगतान किया जाता था, जिसे घटाकर 1525 रुपये कर दिया गया है। इसी राशि में वाहनों का रखरखाव, चालक और सफाई कर्मियों का वेतन तथा कचरा संग्रहण की जिम्मेदारी शामिल होने से व्यवस्था प्रभावित होने की बात सामने आ रही है।

नगर परिषद परिसर में रोड स्वीपिंग मशीन, जेसीबी, नाली सफाई मशीन, फॉगिंग मशीन, ट्रैक्टर, पानी टैंकर और हाइड्रोलिक डाला सहित कई उपकरण भी निष्क्रिय पड़े हैं। हैरानी की बात यह है कि पिछले छह महीनों में करोड़ों रुपये के नए वाहन खरीदे गए, लेकिन वे भी फिलहाल उपयोग के बजाय धूल फांक रहे हैं।

इस संबंध में नगर प्रबंधक सुभाष हेम्ब्रम ने बताया कि स्पेयर पार्ट्स की अनुपलब्धता और आवश्यक एनओसी लंबित रहने के कारण समस्या उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि खराब वाहनों को दुरुस्त करने की प्रक्रिया जारी है और फिलहाल चालू वाहनों के माध्यम से ही कचरा उठाव कराया जा रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / Anup Kumar Roy