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झारखंड विधानसभा में सिकिदिरी जल विद्युत परियोजना में कथित अनियमितताओं पर उठा सवाल

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झारखंड विधानसभा में सिकिदिरी जल विद्युत परियोजना में कथित अनियमितताओं पर उठा सवाल


रांची, 26 फरवरी (हि.स.)। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के सातवें दिन गुरुवार को सिकिदिरी जल विद्युत परियोजना में कथित अनियमितताओं और प्राक्कलन से अधिक व्यय का मामला सदन में उठा।

विधायक राज सिन्हा ने सरयू राय के सवाल को उठाते हुए कहा कि सरकार अक्सर वित्तीय कमी और केंद्र के सहयोग नहीं मिलने की बात करती है, लेकिन 4.88 करोड़ रुपये के प्राक्कलन वाले कार्य के लिए न्यायालय से 130 करोड़ रुपये भुगतान का आदेश होना गंभीर विषय है।

मामला वर्ष 2012 में भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) द्वारा सिकिदिरी जल विद्युत परियोजना की मरम्मत से जुड़ा है।

परियोजना के प्रोजेक्ट मैनेजर ने दोनों इकाइयों की मरम्मत के लिए 4.88 करोड़ रुपये का प्राक्कलन तैयार किया था।

इसके विपरीत 2 मार्च 2012 को तत्कालीन मुख्य अभियंता (उत्पादन) ने 20.87 करोड़ रुपये व्यय की कार्यदिश जारी कर दी।

बाद में भुगतान विवाद को लेकर मामला न्यायालय पहुंचा और कमर्शियल कोर्ट, रांची ने 9 अक्टूबर 2023 को झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड ( जेयूयूएनएल) के विरुद्ध आदेश पारित करते हुए भेल को ब्याज सहित लगभग 130 करोड़ रुपये भुगतान का आदेश दिया।

इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील (01/2025) और उच्चतम न्यायालय में एसएलपी (9580/2025) दायर की गई, जो खारिज हो चुकी है। इसके बाद जेयूयूएनएल ने उच्च न्यायालय में रिव्यू पिटीशन (डायरी संख्या 35899/2025, दिनांक 6 जुलाई 2025) दाखिल किया है।

वहीं भेल ने आदेश के अनुपालन के लिए कमर्शियल कोर्ट में केस नंबर 05/2024 दायर कर संपत्ति कुर्की का अनुरोध किया है। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च 2026 को निर्धारित है।

प्रभारी मंत्री योगेंद्र महतो ने बताया कि इस मामले में सीबीआई में केस नंबर सीबी 1/07/2016 दर्ज है और मामला सीबीआई कोर्ट, रांची में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि जांच में भेल के तीन और जेयूवीएनएल के चार अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है।

वित्त सचिव की अध्यक्षता में गठित त्रिसदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन झारर राज्य विद्युत बोर्ड (जेएसईबी) के 4 पदाधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई चलाई गई। मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि पूरे मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी।

कोडरमा विधायक नीरा यादव ने की स्पंज आयरन फैक्ट्री को घनी आबादी से हटाने की मांग

विधायक नीरा यादव ने झारखंड विधानसभा में कोडरमा रेलवे स्टेशन के पास संचालित स्पंज आयरन फैक्ट्री से हो रहे कथित प्रदूषण का मामला उठाया। उन्होंने इस फैक्ट्री को घनी आबादी से हटाने की मांग की।

विधायक ने कहा कि रेलवे स्टेशन और नेशनल हाईवे के पास स्थित इस फैक्ट्री से निकलने वाला धुआं और प्रदूषण से आसपास के लोगों को परेशानी हो रही है। उन्होंने उद्योग विभाग से मिले जवाब पर असंतोष जताते हुए आरोप लगाया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गलत जानकारी दी है।

इस पर मंत्री संजय यादव ने बताया कि फैक्ट्री घनी आबादी से कितनी दूरी पर है, इसकी जांच के लिए उपायुक्त की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी बनाई गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि सदन जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होगा तो नई कमेटी गठित की जाएगी।

विधायक नीरा यादव ने सदन में कहा कि गलत जानकारी देना गंभीर मामला है और यदि किसी अधिकारी ने ऐसा किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। मामले को लेकर सदन में कुछ देर तक बहस होती रही और सरकार ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे