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रांची में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘वोटर रजिस्ट्रेशन एंड रजिस्टर्स 2026’ शुरू, मतदाता सूची की शुद्धता और समावेशन पर जोर

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रांची में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘वोटर रजिस्ट्रेशन एंड रजिस्टर्स 2026’ शुरू, मतदाता सूची की शुद्धता और समावेशन पर जोर


रांची में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘वोटर रजिस्ट्रेशन एंड रजिस्टर्स 2026’ शुरू, मतदाता सूची की शुद्धता और समावेशन पर जोर


रांची में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘वोटर रजिस्ट्रेशन एंड रजिस्टर्स 2026’ शुरू, मतदाता सूची की शुद्धता और समावेशन पर जोर


रांची में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘वोटर रजिस्ट्रेशन एंड रजिस्टर्स 2026’ शुरू, मतदाता सूची की शुद्धता और समावेशन पर जोर


रांची, 02 सितंबर (हि.स.)। झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की ओर से केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘वोटर रजिस्ट्रेशन एंड रजिस्टर्स 2026’ का बुधवार को नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (एनयूएसआरएल), रांची में शुभारंभ हुआ। सम्मेलन में मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची की शुद्धता, समावेशन, तकनीक और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विमर्श किया जा रहा है।

आईआईएम रांची, एनयूएसआरएल रांची और सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची सम्मेलन के नॉलेज पार्टनर हैं। उद्घाटन सत्र में भारत निर्वाचन आयोग के प्रधान सचिव अरविंद आनंद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार, केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर, एनयूएसआरएल के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल तथा सेंट जेवियर्स कॉलेज के प्राचार्य डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर सहित शिक्षाविद्, शोधकर्ता और विषय विशेषज्ञ मौजूद रहे।

दीप प्रज्ज्वलन के बाद अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार ने स्वागत संबोधन दिया। इस दौरान सम्मेलन पुस्तक ‘वोटर रजिस्ट्रेशन एंड रजिस्टर्स : फाउंडेशंस, ग्लोबल प्रैक्टिस एंड लीगल फ्रेमवर्क’ के वॉल्यूम-1, ‘वोटर रजिस्ट्रेशन एंड वोटर रजिस्टर्स : थ्योरी, अवेयरनेस, इनक्लूजन एंड टेक्नोलॉजी’ के वॉल्यूम-2 तथा स्मारिका का विमोचन किया गया।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने इस अवसर पर कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य वर्तमान में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से आगे बढ़कर मतदाता पंजीकरण के विषय पर व्यापक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में विमर्श करना है।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन के लिए 800 से अधिक विश्वविद्यालयों और संस्थानों से संपर्क किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 230 शोध-सार प्राप्त हुए। स्वतंत्र अकादमिक विशेषज्ञ समिति ने इनमें से 80 सार को शॉर्टलिस्ट किया और अंततः 58 शोध-पत्रों को प्रकाशन एवं विचार-विमर्श के लिए चुना गया।

कुमार ने कहा कि विभिन्न देशों में सक्रिय, स्वचालित और हाइब्रिड मतदाता पंजीकरण प्रणालियां प्रचलित हैं। कई देशों में जनसंख्या डेटाबेस, सिविल रजिस्ट्री, बायोमेट्रिक्स और सतत अद्यतनीकरण जैसी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल बढ़ रहा है। भारत में मजबूत संवैधानिक और कानूनी ढांचे के साथ व्यापक क्षेत्रीय सत्यापन तथा राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य ऐसी शुद्ध, समावेशी और पारदर्शी मतदाता सूची सुनिश्चित करना है, जिसमें प्रत्येक पात्र नागरिक शामिल हो और कोई अपात्र व्यक्ति दर्ज न रहे।

उन्होंने कहा कि भारत मतदाता सूची प्रबंधन को और मजबूत बनाने के लिए तकनीक एवं डेटाबेस आधारित सत्यापन का क्रमिक रूप से इस्तेमाल कर रहा है। इससे मतदाता अभिलेखों में विसंगतियों की पहचान और सूची की शुद्धता में सुधार किया जा सकता है। हालांकि पूरी प्रक्रिया क्षेत्रीय सत्यापन, राजनीतिक दलों एवं अन्य हितधारकों की सहभागिता, न्यायिक समीक्षा तथा भारत निर्वाचन आयोग के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण में संचालित होती है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि सम्मेलन विद्वानों, शोधकर्ताओं और निर्वाचन से जुड़े व्यावहारिक विशेषज्ञों को मतदाता पंजीकरण प्रणालियों का आलोचनात्मक अध्ययन करने तथा अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से सीखने के लिए एक खुला अकादमिक मंच उपलब्ध कराता है। चयनित 58 शोध-पत्रों और दो दिवसीय विचार-विमर्श से सामने आने वाले महत्वपूर्ण निष्कर्षों को भौतिक एवं निःशुल्क डिजिटल स्वरूप में प्रकाशित किया जाएगा, ताकि भविष्य के शोध और निर्वाचन प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण ज्ञान-संसाधन तैयार हो सके।

एनयूएसआरएल के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल ने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक सहभागिता का प्रवेश द्वार है और विश्वसनीय चुनाव की शुरुआत शुद्ध, समावेशी एवं नियमित रूप से अद्यतन मतदाता सूची से होती है। उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया की शुचिता और समावेशन के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।

सेंट जेवियर्स कॉलेज के प्राचार्य डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर ने कहा कि शुद्ध और समावेशी मतदाता सूची मजबूत लोकतंत्र की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि कॉलेज और विश्वविद्यालय मतदाता जागरूकता, परिसर आधारित पंजीकरण अभियान और नागरिक शिक्षा के माध्यम से लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने बढ़ते प्रवासन, शहरीकरण और तकनीकी बदलाव के बीच युवा मतदाताओं, प्रवासियों तथा वंचित समुदायों की निर्वाचन प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही डेटा की शुद्धता, निजता, सुगम्यता, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार इस्तेमाल तथा निर्वाचन प्रणाली में जनविश्वास बनाए रखने से जुड़ी चुनौतियों को भी रेखांकित किया।

केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के साथ विश्वविद्यालय की साझेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे अकादमिक शोध और निर्वाचन प्रबंधन के व्यावहारिक अनुभवों को एक मंच पर लाने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल देश में निर्वाचन प्रक्रिया के संचालन के लिए व्यापक लॉजिस्टिक व्यवस्था और दक्ष पेशेवरों की आवश्यकता है। उभरती तकनीकों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से निर्वाचन प्रबंधन में नई संभावनाओं के साथ नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।

अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार ने कहा कि लोकतंत्र की पूरी प्रक्रिया के केंद्र में नागरिक और मतदाता होते हैं। इसलिए शुद्ध, समावेशी और पारदर्शी मतदाता सूची मजबूत लोकतंत्र की बुनियाद है। भारत जैसे विशाल देश में प्रवासन, शहरीकरण, बदलती जनसंख्या और नए युवा मतदाताओं के कारण मतदाता सूची को लगातार अद्यतन रखना आवश्यक है।

उन्होंने झारखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से छूटे नहीं और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम इसमें शामिल न हो।-------------

हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे