home page

भारतमाला परियोजना का ग्रामीणों ने किया विरोध, एक इंच भी जमीन नहीं देने का ऐलान

 | 
भारतमाला परियोजना का ग्रामीणों ने किया विरोध, एक इंच भी जमीन नहीं देने का ऐलान


खूंटी, 30 जुलाई (हि.स.)। भारतमाला सड़क परियोजना के विरोध में गुरुवार को कर्रा प्रखंड के स्कूल मैदान में प्रभावित ग्रामीणों की एक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सामाजिक कार्यकर्ता फ्रैंकलिन धान ने की। इस दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत भूमि अधिग्रहण और मुआवजा भुगतान से संबंधित जारी नोटिस का ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए परियोजना के लिए एक इंच भी जमीन नहीं देने का ऐलान किया।

बैठक को संबोधित करते हुए फ्रैंकलिन धान ने कहा कि यह क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है और यहां पेसा कानून लागू है। इसके बावजूद ग्रामसभा की सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करना और नोटिस जारी करना आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि कर्रा प्रखंड के 28 प्रस्तावित विस्थापित रैयत भारतमाला परियोजना का विरोध कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने कहा कि अधिकांश परिवारों के पास केवल दो से तीन एकड़ कृषि भूमि है, जो उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। यदि यह जमीन अधिग्रहित कर ली गई तो वे खेती-किसानी से वंचित हो जाएंगे और भविष्य में विस्थापन और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा। उनका कहना था कि इससे भुखमरी जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।

बैठक में भारतमाला परियोजना से प्रभावित 28 गांवों के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में वर्तमान स्वरूप में भारतमाला सड़क परियोजना को रद्द करने की मांग की और कहा कि ग्रामसभा की सहमति के बिना किसी भी कीमत पर भूमि अधिग्रहण स्वीकार नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन जारी रखने का भी संकल्प लिया।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मिश्रा