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पहाड़ी मंदिर में राजनीतिक दल से जुड़े व्यक्तियों को शामिल करने पर होगा आंदोलन : समिति

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पहाड़ी मंदिर में राजनीतिक दल से जुड़े व्यक्तियों को शामिल करने पर होगा आंदोलन : समिति


रांची , 26 अप्रैल (हि.स.)। रांची पहाड़ी मंदिर विकास समिति ने झारखंड राज्य हिन्दू धार्मिक न्यास बोर्ड की ओर से जारी नई अधिसूचना पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की है। समिति की रविवार को हुई बैठक में सदस्यों ने कहा कि न्यास बोर्ड की मनमानी और एकतरफा कार्रवाई को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। समिति ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पहाड़ी मंदिर की परंपरा, संविधान और धार्मिक गरिमा के विरुद्ध किसी भी अवैध कार्रवाई का पुरजोर विरोध किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि झारखंड उच्च न्यायालय की ओर से पारित आदेश की अवहेलना करते हुए जिस प्रकार नई समिति के गठन की अधिसूचना जारी की गई है, वह न केवल न्यायालयीय आदेशों की अवमानना प्रतीत होती है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था को भी ठेस पहुंचाने वाली कार्रवाई है।

समिति ने यह भी कहा कि अधिसूचना में समिति को भंग करने के लिए जो तर्क और आरोप लगाए गए हैं, वे पूर्णतः तथ्यहीन और निराधार हैं। समिति के अनुसार रांची पहाड़ी मंदिर विकास समिति के न्यास बोर्ड से प्राप्त सभी पत्रों और नोटिसों का समय-समय पर विधिवत उत्तर दिया गया है। वहीं मंदिर समिति की ओर से भेजे गए विभिन्न पत्रों एवं स्पष्टीकरणों पर न्यास बोर्ड ने कोई जवाब नहीं दिया। समिति ने आरोप लगाया कि बिना तथ्यों की निष्पक्ष समीक्षा किए एकतरफा निर्णय लिया गया है।

समिति ने गंभीर आरोप लगाया कि न्यास बोर्ड की गठित तथाकथित नई समिति में राजनीतिक दल से जुड़े व्यक्तियों और नेताओं को शामिल किया गया है, जबकि पहाड़ी मंदिर के संविधान एवं परंपराओं के अनुसार किसी भी राजनीतिक दल से प्रत्यक्ष रूप से संबद्ध व्यक्ति को समिति का सदस्य बनाए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। समिति के अनुसार यह कार्रवाई मंदिर प्रशासन के राजनीतिकरण का प्रयास है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

समिति ने यह भी कहा कि पहाड़ी मंदिर सदैव धार्मिक और सामाजिक समरसता का केंद्र रहा है एवं इसे राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखना आवश्यक है। न्यास बोर्ड की ओर से जारी अधिसूचना मंदिर की स्थापित व्यवस्था और परंपराओं के विपरीत है।

समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जबरन पहाड़ी मंदिर का प्रभार लेने या उक्त अधिसूचना को बलपूर्वक लागू करने का प्रयास किया गया, तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर समिति व्यापक जनआंदोलन और उग्र आंदोलन करने को भी बाध्य होगी, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी न्यास बोर्ड से संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की होगी।

उक्त जानकारी पहाड़ी मंदिर जनसंपर्क समिति के सदस्य सौरव चौधरी ने दी।

बैठक में राजेश गड़ोदिया, मदन पारीक, सुनील माथुर, जितेंद्र प्रसाद, राजकुमार शर्मा, प्रवीण अग्रवाल, संदीप जैन, संजय गोयल, राहुल तिवारी, अंकित, नितेश लोहिया एवं समिति के अन्य कई सदस्य उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak