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पशु चिकित्सकों का पेशा मानव डॉक्टरों की तुलना में अधिक पवित्र : कुलपति

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पशु चिकित्सकों का पेशा मानव डॉक्टरों की तुलना में अधिक पवित्र : कुलपति


रांची, 25 अप्रैल (हि.स.)। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एससी दुबे ने कहा कि पशु चिकित्सकों का पेशा मानव डॉक्टरों की तुलना में अधिक पवित्र है, क्योंकि वे उन बेजुबान पशुओं और पक्षियों की सेवा करते हैं जो अपनी बीमारी, दर्द, समस्याओं और लक्षणों को व्यक्त नहीं कर सकते।

उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर पशु स्वास्थ्य के संरक्षक के रूप में उनका जीवन अत्यंत कठिन होता है और पशुओं का स्वास्थ्य सीधे तौर पर मनुष्यों और पर्यावरण से जुड़ा हुआ है। मानव स्वास्थ्य सेवा में उपयोग से पहले सभी तकनीकों, दवाओं और प्रक्रियाओं का परीक्षण पशुओं पर किया जाता है।

डॉ दुबे शनिवार को बीएयू के पशु चिकित्सा महाविद्यालय में आयोजित विश्व पशु चिकित्सा दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।

पशु उत्पादों में सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पोषण सामग्री को बेहतर बनाने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत की लगभग 50 प्रतिशत आबादी कुपोषण, अल्पपोषण और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से जूझ रही है।

पशु चिकित्सा पेशा विश्व स्तर पर सर्वश्रेष्ठ में से एक : डॉ एके श्रीवास्तव

उन्होंने यह भी कहा कि उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास भविष्य के उपयोगकर्ताओं और पर्यावरण के हितों से समझौता किए बिना होने चाहिए।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि डॉ एके श्रीवास्तव (पशु चिकित्सा संकाय के पूर्व डीन और आरकेडीएफ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति) ने कहा कि पशु चिकित्सा पेशा विश्व स्तर पर सर्वश्रेष्ठ में से एक है, क्योंकि इसमें बेरोजगारी या अल्प रोजगार की समस्या नहीं है। उन्होंने छात्रों को विनम्र, अनुशासित, परिश्रमी और लचीला बनने की सलाह दी ताकि उनका करियर सुचारु रूप से आगे बढ़ सके।

अतिथियों का स्वागत करते हुए पशु चिकित्सा विज्ञान और पशुपालन संकाय के डीन डॉ एमके गुप्ता ने कहा कि पशु चिकित्सक ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यंत कठिन और खतरनाक परिस्थितियों में काम करते हुए पशुधन, वन्य और बंदी पशुओं की देखभाल करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके लिए बुनियादी ढांचे, सुरक्षा उपायों और मानक संचालन प्रक्रियाओं में सुधार समय की मांग है। उन्होंने बताया कि देश में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन मांस, दूध और अंडों की उपलब्धता क्रमशः 480 मिलीलीटर, 15–20 ग्राम और 100–110 है, जिसे और बढ़ाने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में डॉ जेपी श्रीवास्तव, डॉ डीके सिंह और छात्र राहुल प्रसाद ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम का संचालन डॉ प्रज्ञा प्रिया लकड़ा और डॉ विशाखा सिंह ने किया।

इस अवसर पर छात्रों के लिए आयोजित क्विज, पोस्टर मेकिंग, वक्तृत्व और रंगोली प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरित किया गयाए। साथ ही, बकरियों और अन्य पशुओं के लिए स्वास्थ्य शिविर और नुक्कड़ नाटक का भी आयोजन किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak