बाबूलाल ने ट्रेजरी घोटाले को लेकर लिखा मुख्यमंत्री को पत्र, की सीबीआई जांच की मांग
रांची,11 अप्रैल (हि.स.)। झारखंड के हजारीबाग और बोकारो जिला में ट्रेजरी से हुई अवैध वित्तीय निकासी मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को शनिवार को पत्र लिखकर झारखंड ट्रेजरी घोटाले की सीबीआई या न्यायिक जांच कराने का आग्रह किया है।
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में बाबूलाल मरांडी ने राज्य में पिछले कुछ दिनों से उजागर हो रहे ट्रेजरी घोटाले पर चिंता जताते हुए कहा है कि अब पूरे देश में यह गंभीर चिंता और चर्चा का विषय बन चुका है। यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं प्रतीत होता, बल्कि यह एक व्यापक और संगठित भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है। परिस्थितियां इस प्रकार बनती दिख रही हैं जैसे चारा घोटाला के काले अध्याय की पुनरावृत्ति हो रही हो।
इस पत्र में उन्हाेंने कहा कि जिस प्रकार चारा घोटाले में डोरंडा ट्रेजरी से 140 करोड़ रुपये की अवैध निकासी हुई थी, उसी तरह वर्तमान में झारखंड के कई जिलों में, पुलिस विभाग के माध्यम से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले सामने आ रहे हैं।
उन्होंने पत्र में लिखा है कि अब तक उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार, इस घोटाले की पुष्टि बोकारो, हजारीबाग, साहिबगंज, गढ़वा और पलामू जैसे जिलों में हो चुकी है। केवल इन जिलों से ही 35 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी का संकेत मिला है। यह आंकड़ा अपने आप में गंभीर है लेकिन जिस गति से नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि यह घोटाला कहीं अधिक व्यापक और गहरा हो सकता है।
इन बिन्दुओं पर मुख्यमंत्री को कराया ध्यान आकर्षित
-प्रारंभिक स्तर पर यह मामला केवल बोकारो जिला तक सीमित प्रतीत हो रहा था लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी और परतें खुलती गईं। यह स्पष्ट हो गया कि अवैध निकासी का यह जाल हजारीबाग, गढ़वा, साहिबगंज और पलामू तक फैल चुका है। इससे यह प्रतीत होता है कि यह कोई स्थानीय या सीमित स्तर का घोटाला नहीं, बल्कि पूरे झारखंड में फैला एक संगठित आर्थिक अपराध है। अतः इसकी जांच भी राज्यव्यापी स्तर पर, निष्पक्ष और गहन तरीके से कराई जानी आवश्यक है।
-बोकारो में गिरफ्तार लेखपाल कौशल पांडेय को इस पूरे घोटाले का मुख्य आरोपी बताना वास्तविकता से परे प्रतीत होता है। यह मानना तर्कसंगत नहीं है कि एक अकेला लेखपाल ई-कुबेर प्रणाली में छेड़छाड़ कर, किसी सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी की जन्मतिथि में बदलाव कर, करोड़ों रुपये की अवैध निकासी जैसे जटिल षड्यंत्र को अपने दम पर अंजाम दे सकता है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि यह मामला किसी बड़े नेटवर्क और उच्चस्तरीय मिलीभगत से जुड़ा हुआ है।
-गंभीर बात यह है कि बोकारो जिला में उपेंद्र सिंह के नाम पर वेतन की राशि अनु पांडे के खाते में 63 बार स्थानांतरित होती रही और पूरे पुलिस महकमे को इसकी जानकारी तक नहीं हुई। यह स्थिति अत्यंत संदिग्ध है और यह मानना कठिन है कि बिना वरीय पुलिस अधिकारियों की जानकारी या संरक्षण के ऐसा संभव हो सकता है।
-इस पूरे प्रकरण में एक और चिंताजनक पहलू यह है कि कौशल पांडेय जैसे आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति को पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता, बोकारो के पूर्व पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गीयारी, पूर्व पुलिस उप महानिरीक्षक पटेल मयूर कन्हैयालाल तथा पूर्व डीआईजी (बजट) नौशाद आलम जैसे वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रशस्ति पत्र दिया था। यह तथ्य इस ओर संकेत करता है कि आरोपित को न केवल संरक्षण प्राप्त था, बल्कि उसे संस्थागत स्तर पर प्रोत्साहन भी मिला हुआ था।
-घोटाले की राशि भी लगातार बढ़ती जा रही है बोकारो में जहां प्रारंभिक आंकड़ा 3.5 करोड़ रुपये का बताया गया था, वह बढ़कर 4.5 करोड़ और फिर 06 करोड़ तक पहुंच गया। इसी प्रकार हजारीबाग में यह राशि बढ़ते-बढ़ते 28 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। केवल दो जिलों में ही प्रारंभिक जांच में लगभग 35 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की पुष्टि होना अत्यंत गंभीर स्थिति को दर्शाता है। अगर इस मामले की गहन और निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो यह घोटाला हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है और चारा घोटाला जैसे चर्चित घोटाले को भी पीछे छोड़ सकता है।
नेता प्रतिपक्ष ने इन बिन्दुओं पर पत्र के माध्यम से ध्यान आकर्षित कराते हुए कहा है कि ऐसी स्थिति में, जब इस पूरे मामले में ऊपर से लेकर नीचे तक कई पुलिस अधिकारी संदेह के घेरे में हों, तब उसी विभाग की ओर से जांच कराना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन होगा। निष्पक्षता, पारदर्शिता और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि इस पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र और विश्वसनीय एजेंसी की ओर से कराई जाए।
उन्होंने मांग करते हुए कहा है कि इस बहुचर्चित और गंभीर ट्रेज़री महाघोटाले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से या झारखंड उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक जांच के माध्यम से कराई जाए, ताकि सत्य उजागर हो सके और दोषियों को कठोरतम दंड मिल सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

