home page

मूलवासियों की अस्मिता को नकारने के लिए हुआ था तपकरा हत्याकांड

 | 
मूलवासियों की अस्मिता को नकारने के लिए हुआ था तपकरा हत्याकांड


खूंटी, 02 मार्च (हि.स.)। तपकरा हत्याकांड की 80वीं बरसी पर सोमवार को कोईल कारो जनसंगठन और गुड़िया पड़हा के संयुक्त तत्वावधान में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। तपकरा बाजार टांड़ के शहीद स्मारक स्थल में उपस्थित ग्रामीणों की ओर से पुष्पांजलि और मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

इसके बाद पारम्परिक ग्राम अगुवा विनोद मुंडा की अध्यक्षता में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। श्रद्धांजलि सभा में सामाजिक अगुआ, बुद्धिजीवी और कानूनी विशेषज्ञों ने दो मार्च 1946 को तपकरा में हुए राजनीतिक हत्याकांड की वास्तविकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस घटना को सभी आदिवासियों और मूलवासियों की अस्मिता को नकारने के लिए अंजाम दिया गया।

वक्ताओं ने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस पार्टी नहीं चाहती थी कि संविधान सभा में आदिवासी-मूलवासियों की आवाज शामिल हों, इसलिए कांग्रेसियों ने अपने प्रत्याशी का पक्ष मजबूत करने के लिए साजिश रच कर झारखंड की मजबूत आवाज मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के समर्थकों पर कातिलाना हमला किया था। यह घटना तमाम झारखंंडियों को सबक होना चाहिए कि हमारे अस्तित्व को समाप्त करने का सिलसिला संविधान निर्माण के समय से ही चला आ रहा है। इस षडयंत्र के प्रति हम जागरूक नहीं होंगे तो आने वाले समय में सभी संवैधानिक शक्तियों से हमें वंचित कर दिया जाएगा।

बैठक को प्रखंड प्रमुख रोहित सुरीन, झारखंड उलगुलान संघ के संयोजक अलेस्टेयर बोदरा, जोन जुरसेन गुड़िया, मसीहदास गुड़िया, सेरेंग पतरस गुड़िया, रेजन गुड़िया, आशीष गुड़िया, पारम्परिक हातु सभा संघ के अध्यक्ष उम्बुलन तोपनो, अमृता तिर्की, जीवन हेमरोम सहित अन्य ने संबोधित किया।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मिश्रा