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जमीन से जुड़े कार्यकर्ता से सत्ता के शिखर तक पहुंचे सुदिव्य सोनू, 56 वर्ष की उम्र में निधन

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जमीन से जुड़े कार्यकर्ता से सत्ता के शिखर तक पहुंचे सुदिव्य सोनू, 56 वर्ष की उम्र में निधन


रांची/गिरिडीह, 06 सितंबर (हि.स.)। झारखंड सरकार के उच्च शिक्षा, खेल, पर्यटन, संस्कृति एवं युवा कार्य मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू का रविवार तड़के गिरिडीह के मर्सी अस्पताल में निधन हो गया। वे 56 वर्ष के थे। अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, पांच सितंबर की देर रात अचानक सीने में तेज दर्द के बाद उन्हें गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था। चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। सुबह 4:05 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

सुदिव्य कुमार सोनू के निधन की खबर फैलते ही गिरिडीह से लेकर रांची तक झामुमो कार्यकर्ताओं, समर्थकों और राजनीतिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। जमीन से जुड़े एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में राजनीतिक सफर शुरू करने वाले सोनू ने संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालते हुए गिरिडीह की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई और लगातार दो बार विधानसभा चुनाव जीतकर हेमंत सोरेन सरकार में महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी तक पहुंचे।

सीने में तेज दर्द के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया

मर्सी अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, हरसिंहरायडीह निवासी सुदिव्य कुमार सोनू को पांच सितंबर की मध्यरात्रि घर पर अचानक सीने में तेज दर्द हुआ। स्थिति गंभीर होने पर उन्हें रात करीब 2:15 बजे अस्पताल लाया गया। अस्पताल पहुंचने के समय उनकी हालत अत्यंत गंभीर थी। उन्हें सीने में दर्द के साथ उल्टी के एस्पिरेशन की समस्या थी। उनका ब्लड प्रेशर रिकॉर्ड नहीं हो पा रहा था, जबकि पल्स और ऑक्सीजन सैचुरेशन लगातार गिर रहा था।

आईसीयू विशेषज्ञों और चिकित्सकों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया। उन्हें ट्यूब लगाई गई और डबल इनोट्रॉपिक दवाएं दी गईं। इलाज के दौरान उनकी स्थिति अचानक और गंभीर हो गई तथा वे कोलैप्स कर गए। इसके बाद चिकित्सकों ने तत्काल सीपीआर और कार्डिएक कम्प्रेशन शुरू किया।

मेडिकल बुलेटिन के मुताबिक, इस दौरान उनके व्यक्तिगत कार्डियोलॉजिस्ट से करीब डेढ़ घंटे तक वीडियो कॉल के माध्यम से चिकित्सकीय सलाह ली गई और उनके निर्देशानुसार आवश्यक दवाएं एवं उपचार किए गए। इलाज के दौरान उन्हें दोबारा कार्डियक अरेस्ट आया। चिकित्सकों ने डीसी शॉक दिया और करीब दो घंटे तक लगातार सीपीआर किया। तमाम प्रयासों के बावजूद रक्त संचार को दोबारा सामान्य नहीं किया जा सका। अंततः सुबह 4:05 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

1989 में झामुमो से शुरू किया था राजनीतिक सफर

सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक जीवन संघर्ष और संगठन के प्रति समर्पण से भरा रहा। शंभूनाथ विश्वकर्मा के पुत्र सुदिव्य कुमार उर्फ सोनू वर्ष 1989 में झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़े। उस समय उन्होंने एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में पार्टी में कदम रखा था। झारखंड अलग राज्य आंदोलन के दौर में उन्होंने पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाई। संगठन को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए उन्होंने लगातार काम किया। कभी दीवार लेखन किया तो कभी कंधे पर झामुमो का झंडा लेकर गांवों और कस्बों में पहुंचे। पार्टी के आंदोलनों और कार्यक्रमों में उनकी सक्रियता लगातार बढ़ती गई। उनका संगठन से यह जुड़ाव आगे चलकर पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों तक पहुंचा।

गिरिडीह नगर कमिटी के संस्थापक अध्यक्ष बने

संगठन के प्रति उनकी सक्रियता और समर्पण को देखते हुए वर्ष 1992 में उन्हें गिरिडीह नगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। वह गिरिडीह नगर कमिटी के संस्थापक अध्यक्ष बने। इसके बाद वर्ष 2003 में उन्हें झामुमो का जिलाध्यक्ष बनाया गया। वर्ष 2003 से 2010 तक उन्होंने जिलाध्यक्ष के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने गांव से लेकर शहर तक पार्टी संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया। कार्यकर्ताओं के बीच उनकी सक्रियता और सहज व्यवहार के कारण संगठन में उनकी पकड़ मजबूत होती गई।

1991 में गोड्डा में किया था चुनाव प्रचार

सुदिव्य कुमार सोनू के राजनीतिक सफर में वर्ष 1991 का लोकसभा चुनाव भी एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा। संगठन की ओर से उन्हें गोड्डा संसदीय क्षेत्र भेजा गया था, जहां उन्हें झामुमो प्रत्याशी सूरज मंडल के पक्ष में प्रचार की जिम्मेदारी मिली थी। बताया जाता है कि वह अपनी जीप से गोड्डा पहुंचे और चुनाव प्रचार में जुट गए। इसी दौरान 21 मई 1991 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की खबर सामने आई। इस घटना के बाद चुनाव स्थगित कर दिया गया। सोनू गोड्डा में ही पार्टी के काम में जुटे रहे और मतदान से पहले वापस लौटे।

2009 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा

संगठन में लंबे समय तक काम करने के बाद वर्ष 2009 में झामुमो ने उन्हें गिरिडीह विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। हालांकि पहले विधानसभा चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली और वह छठे स्थान पर रहे। वर्ष 2014 में पार्टी ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया। इस चुनाव में उनकी सीधी टक्कर तत्कालीन विधायक और भाजपा प्रत्याशी निर्भय कुमार शाहाबादी से हुई। सोनू चुनाव हार गए, लेकिन इस बार उनके प्रदर्शन में बड़ा सुधार हुआ और वह छठे स्थान से सीधे दूसरे पायदान पर पहुंच गए। इसके बाद वर्ष 2019 में झामुमो ने उन्हें तीसरी बार उम्मीदवार बनाया। इस बार भी उनका मुकाबला निर्भय कुमार शाहाबादी से हुआ और उन्होंने जीत दर्ज कर विधानसभा में प्रवेश किया। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें दोबारा गिरिडीह से मैदान में उतारा। उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। गिरिडीह सीट पर लगातार दो चुनावों में भाजपा को पराजित करने के बाद झामुमो में उनका राजनीतिक कद और मजबूत हुआ।

हेमंत सोरेन सरकार में संभाली महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां

विधायक बनने के बाद सुदिव्य कुमार सोनू को हेमंत सोरेन सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। उनके पास उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति तथा खेलकूद एवं युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग रहे।सरकार और संगठन दोनों में उनकी भूमिका सक्रिय रही। उन्हें झामुमो के रणनीतिकारों में गिना जाता था। सरकार और संगठन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी।

हाल के दिनों में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) से जुड़ी कथित गड़बड़ियों को लेकर हुए छात्र आंदोलन के दौरान भी वह सरकार और छात्रों के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिशों में सक्रिय रहे। सरकार की ओर से गठित चार मंत्रियों की समिति में भी वह शामिल थे। छात्र संगठनों और सरकार के बीच संवाद में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई।

दिशोम गुरु शिबू सोरेन के करीबी नेताओं में थे

सुदिव्य कुमार सोनू झामुमो के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के करीबी माने जाते थे। लंबे समय तक संगठन में काम करने के कारण उन्हें पार्टी की जमीनी राजनीति और कार्यकर्ताओं की नब्ज की अच्छी समझ थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ भी उनका राजनीतिक और संगठनात्मक जुड़ाव मजबूत रहा। मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में उन्हें 'सोनू भैया' कहकर संबोधित किया और उनके निधन को व्यक्तिगत क्षति बताया।

हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड आंदोलन के दौर से ही सुदिव्य कुमार सोनू दिशोम गुरु शिबू सोरेन के साथ पूरी निष्ठा और मजबूती से खड़े रहे। झामुमो के समर्पित सिपाही के रूप में उन्होंने अपना जीवन झारखंड की अस्मिता, अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई को समर्पित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंडियत के प्रति सोनू का समर्पण और उनकी जुझारू भावना हमेशा याद की जाएगी। उन्होंने कहा कि सोनू भैया का स्नेह, संघर्ष और झारखंड के प्रति प्रतिबद्धता जीवनभर उनके साथ रहेगी। मुख्यमंत्री ने भावुक होकर कहा, “सोनू भैया, आपका जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है। आपकी कमी हमेशा महसूस होगी।”

साढ़े तीन साल में शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों का निधन

सुदिव्य कुमार सोनू का निधन झारखंड की राजनीति के साथ-साथ हेमंत सोरेन सरकार के लिए भी एक बेहद दुखद घटना है। यह संयोग भी उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 से अब तक शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों का असामयिक निधन हो चुका है।

इस क्रम में पहला नाम जगरनाथ महतो का है, जिनका छह अप्रैल 2023 को चेन्नई में इलाज के दौरान निधन हुआ था। वह हेमंत सोरेन सरकार में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री थे। कोरोना संक्रमण के बाद उनके फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा था। नवंबर 2020 में उनका फेफड़ा प्रत्यारोपण भी किया गया था, लेकिन बाद में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण उनका निधन हो गया।

इसके बाद रामदास सोरेन को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की जिम्मेदारी मिली। उनका 15 अगस्त 2025 को आकस्मिक निधन हो गया। घर के बाथरूम में गिरने के बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें दिल्ली ले जाया गया था, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। वह घाटशिला से विधायक और झामुमो के वरिष्ठ नेता थे।

अब छह सितंबर 2026 को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे सुदिव्य कुमार सोनू का भी आकस्मिक निधन हो गया। जगरनाथ महतो और रामदास सोरेन जहां स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग संभाल चुके थे, वहीं सोनू उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री थे। इस तरह करीब साढ़े तीन वर्षों के भीतर शिक्षा से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी संभालने वाले झामुमो के तीन मंत्रियों का निधन होना झारखंड की राजनीति का बेहद असाधारण और दुखद संयोग है।--------------

हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे