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रांची में बोरिंग के लिए नए सख्त नियम, रेन वाटर हार्वेस्टिंग चालू होने पर ही मिलेगी अनुमति

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रांची में बोरिंग के लिए नए सख्त नियम, रेन वाटर हार्वेस्टिंग चालू होने पर ही मिलेगी अनुमति


रांची, 03 सितंबर (हि.स.)। राजधानी रांची में लगातार गिरते भूजल स्तर और गर्मियों में जल संकट की स्थिति को देखते हुए रांची नगर निगम ने बोरिंग कराने के लिए नए और सख्त नियम लागू किए हैं। अब निगम क्षेत्र में चार इंच बोरिंग की अनुमति उन्हीं भवनों को मिलेगी, जहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम चालू स्थिति में होगा।

नई व्यवस्था के तहत बिना पूर्व अनुमति बोरिंग कराने पर आवासीय भवनों पर 25 हजार रुपये और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही अवैध बोरिंग को सील भी किया जा सकता है।

नगर निगम ने बोरिंग की अनुमति के लिए शुल्क भी निर्धारित किया है। आवासीय भवनों में 0 से 5,000 वर्गफीट तक के बिल्ड-अप एरिया के लिए 2,500 रुपये और 5,000 वर्गफीट से अधिक के लिए 5,000 रुपये शुल्क लगेगा। वहीं, वाणिज्यिक भवनों में 0 से 1,000 वर्गफीट तक के लिए 10 हजार रुपये तथा 1,000 वर्गफीट से अधिक क्षेत्र के लिए 10 रुपये प्रति वर्गफीट की दर से शुल्क निर्धारित किया गया है।

नियमों के अनुसार, अनुमति मिलने के बाद 15 दिनों के भीतर बोरिंग कराना अनिवार्य होगा। निर्धारित अवधि में काम नहीं कराने पर अनुमति स्वतः रद्द हो जाएगी। एक भवन में मालिक के नाम से केवल एक बोरिंग की अनुमति दी जाएगी। जिस भवन में पहले से छह इंच की बोरिंग है, वहां नई चार इंच बोरिंग की अनुमति नहीं मिलेगी।

वाणिज्यिक बोरिंग में फ्लो मीटर लगाना अनिवार्य होगा। सरकारी जमीन, सड़क, नदी या नाले पर किसी भी परिस्थिति में बोरिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी। अंतिम अनुमति देने से पहले कनीय या सहायक अभियंता स्थल का निरीक्षण करेंगे। अधिकारी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थिति की जांच कर रिपोर्ट देंगे। इसके बाद ही बोरिंग की अनुमति दी जाएगी।

बोरिंग के लिए आवेदक को नगर निगम की जलापूर्ति शाखा में निर्धारित आवेदन पत्र जमा करना होगा। इसके साथ पहचान पत्र, होल्डिंग रसीद, प्रस्तावित बोरवेल स्थल की जीपीएस फोटो, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का विवरण एवं फोटो और शपथ पत्र देना होगा। शपथ पत्र में यह घोषणा करनी होगी कि बोरिंग निजी भूमि पर और केवल पेयजल अथवा घरेलू उपयोग के लिए की जा रही है।

बोरिंग होने के बाद जलस्तर और बोरिंग की गहराई की जानकारी भी नगर निगम को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे