सिदो कान्हू मुर्मू विवि के 10 वें दीक्षांत समारोह में 38 स्वर्ण पदक सहित 4,995 विद्यार्थियों को मिली उपाधि
दुमका, 05 नवंबर (हि.स.)। सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय (एसकेएमयू) का 10 वां दीक्षांत समारोह का आयोजन गुरुवार को हुआ। दीक्षांत समारोह में 38 छात्रों को स्वर्ण पदक, 15 शोधार्थियों को पीएचडी और लगभग 4,995 विद्यार्थियों को अनुपस्थिति मेंउपाधियां दी गईं। दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष गंगवार थे। इस अवसर पर झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रबिंद्रनाथ महतो भी उपस्थित थे।
इस अवसर पर कुलाधिपति ने उपाधिधारकों को डिग्री औ स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने अपने संबोधन में डिग्रीधारी छात्रों को बधाई देते हुए संताल हूल के अमर नायकों—सिदो और कान्हू मुर्मू के साहस, न्याय और संघर्ष की भावना को जीवन के नए चरण में आत्मसात करने को कहा।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी 'विकसित भारत ऐट दि रेट ऑफ 2047' के ऐतिहासिक दौर में स्नातक हो रहे हैं। उन्होंने झारखंड में उद्योग, ऊर्जा और संबंधित क्षेत्रों में 99,000 करोड़ रुपये से अधिक के हालिया निवेश प्रस्तावों और केंद्र-राज्य सहयोग से होने वाले समावेशी विकास को रेखांकित किया। साथ ही एनईपी 2020 के तहत बहुविषयक पाठ्यक्रम, अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स और कौशल विकास को डिग्री से जोड़ने पर बल दिया। कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय में 20 स्नातकोत्तर विभागों की स्वीकृति और 125 शिक्षण पदों के सृजन को इस दिशा में ठोस कदम बताया गया।
उन्होंने संताल परगना में स्थानीय रोजगार की कमी और संकटपूर्ण पलायन को दूर करने के लिए खनिज व वनोपज के मूल्यवर्धन, संताल शिल्प, सांस्कृतिक पर्यटन, नवीकरणीय ऊर्जा और एमएसएमई को बढ़ावा देने का आह्वान किया। युवाओं को स्किल इंडिया, पीएमईजीपी और मुद्रा जैसी योजनाओं से जुड़ने की सलाह दी।
उन्होंने विश्वविद्यालय से 'उन्नत भारत अभियान' को और गहरा करने, आदिवासी समाजों पर सामाजिक-वैज्ञानिक शोध को विस्तार देने और संताल अकादमी एवं मौखिक परंपराओं के दस्तावेजीकरण को सुदृढ़ करने का आग्रह किया। राज्यपाल ने शोध, एनईपी 2020 और क्षेत्रीय विकास पर जोर दिया।
वहीं इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ कुनील कंदीर ने कहा कि दीक्षांत समारोह में 38 स्वर्ण पदक, 15 शोधार्थियों को पीएचडी और लगभग 4,995 विद्यार्थियों को अनुपस्थिति में उपाधियां प्रदान की गईं। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी मुख्य सभागार में उपस्थित नहीं हो सके, उनके लिए महाविद्यालयों और संबंधित संस्थानों में औपचारिक समारोह आयोजित कर उपाधि दिए जाएंगे।
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय निरंतर शोध केंद्र के रूप में उभर रहा है। इस सत्र में 183 नए पीएचडी शोधार्थियों का नामांकन हुआ है, जिनमें नेट और जेआरएफ उत्तीर्ण शोधार्थी तथा पड़ोसी राज्यों के छात्र शामिल हैं।
कुलपति ने परीक्षा नियंत्रक के प्रयासों की सराहना करते हुए बताया गया कि विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने के साथ-साथ सभी शैक्षणिक सत्रों को नियमित किया गया है और परीक्षाएं समय पर आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने मेधावी विद्यार्थियों, लैंगिक समानता और शोध को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक स्नातकोत्तर विभाग से एक छात्र और एक छात्रा को प्रतिवर्ष यह छात्रवृत्ति देने की बात कही।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को अधिक पारदर्शी और भविष्य-उन्मुख बनाने के लिए शोध, नवाचार, खेल, आईटी, कला-संस्कृति और प्लेसमेंट जैसे क्षेत्रों में निदेशकों की नियुक्ति की गई है। साथ ही सीनेट, सिंडिकेट, अकादमिक परिषद और शिकायत निवारण समितियों का पुनर्गठन किया गया है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कई शिक्षक, छात्र और उनके अभिभावक सहित हजारों लोग उपस्थित थे।--
हिन्दुस्थान समाचार / नीरज कुमार

