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संगठित समाज के निर्माण से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव : डॉ. मोहन सिंह

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संगठित समाज के निर्माण से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव : डॉ. मोहन सिंह


संगठित समाज के निर्माण से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव : डॉ. मोहन सिंह


पूर्वी सिंहभूम, 10 जून (हि.स.)। पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) स्थित आरबीएस इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रांगण में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह का आयोजन गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में सर्वाधिकारी महादेव मुंडा , महानगर संघचालक रामचन्द्र राम, जमशेदपुर विभाग संघचालक इंदर अग्रवाल , मुख्य अतिथि स्वामी ईश्वर प्रेमानन्द महाराज, विशिष्ट अतिथि मुरलीधर केडिया तथा मुख्य वक्ता डॉ. मोहन सिंह उपस्थित रहे।

संघ शिक्षा वर्ग के अंतर्गत घोष वर्ग में 72 शिक्षार्थियों तथा सामान्य वर्ग में 172 स्थानों से आए कुल 226 विद्यार्थियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। ये शिक्षार्थी 55 खण्डों, 44 नगरों, 24 जिलों, 4 महानगरों एवं 8 विभागों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

वर्ग के संचालन में प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा, सह प्रांत प्रचारक राजीव कान्त, शारीरिक प्रमुख कुणाल, मुख्य शिक्षक आकाश, सह मुख्य शिक्षक देवेन्द्र सहित शारीरिक, बौद्धिक एवं सर्वव्यवस्था विभाग के अनेक कार्यकर्ताओं ने प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण योगदान दिया। समापन समारोह का संचालन वर्ग कार्यवाह विजय ने किया।

मुख्य वक्ता डॉ. मोहन सिंह ने कहा कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए संगठित समाज के निर्माण से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। उन्होंने स्वयंसेवकों का आह्वान करते हुए कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचकर सेवा, संगठन एवं संस्कार के कार्यों का विस्तार करना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने संघ शिक्षा वर्ग (ओटीसी) की प्रशिक्षण परंपरा एवं उसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संघ के प्राथमिक वर्ग, साप्ताहिक वर्ग तथा 15 दिवसीय शिक्षा वर्ग के माध्यम से स्वयंसेवक स्वप्रेरणा एवं स्वव्यय से प्रशिक्षण प्राप्त कर चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण के कार्य में स्वयं को समर्पित करते हैं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है। संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्र निर्माण, आदर्श नागरिक निर्माण तथा रामराज्य की अवधारणा को साकार करने का संकल्प लिया था। उन्होंने भारत के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध संस्कृति एवं आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए समाज की एकता और संगठन की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. सिंह ने स्वामी विवेकानंद के राष्ट्रीय जागरण में योगदान, शिकागो धर्म संसद में भारत की प्रतिष्ठा तथा उनके द्वारा समाज में राष्ट्रभक्ति के पुनर्जागरण के संदेश का स्मरण कराया। उन्होंने डॉ. हेडगेवार के जीवन एवं संगठन निर्माण के प्रयासों को भी रेखांकित किया।

उन्होंने देश विभाजन की त्रासदी, गांधीजी की हत्या के बाद संघ पर लगे प्रतिबंध, 1962 के भारत-चीन युद्ध में स्वयंसेवकों की भूमिका, 1963 की गणतंत्र दिवस परेड में सहभागिता तथा आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा में स्वयंसेवकों के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने अयोध्या आंदोलन को समाज जागरण एवं संगठन के प्रयास के रूप में भी प्रस्तुत किया।

डॉ. सिंह ने संघ की ओर से समाज परिवर्तन के लिए दिए गए पंच परिवर्तन के आह्वान को विस्तार से रखते हुए कहा कि कुटुंब प्रबोधन के माध्यम से संस्कारित एवं आदर्श परिवारों का निर्माण, सामाजिक समरसता के माध्यम से जाति-पांति से ऊपर उठकर एकात्म भाव का विकास, पर्यावरण संरक्षण के अंतर्गत पौधारोपण, जल संरक्षण एवं स्वच्छता, स्वदेशी के आचरण के माध्यम से मातृभाषा एवं स्वदेशी उत्पादों के सम्मान तथा नागरिक कर्तव्यों के निर्वहन के माध्यम से अनुशासित एवं उत्तरदायी समाज का निर्माण आवश्यक है।

अंत में उन्होंने भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के संकल्प के साथ निरंतर पुरुषार्थ, सेवा और समर्पण का संदेश दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे