कृषि भूमि पर रिम्स-2 निर्माण के विरोध में पदयात्रा, मुख्यमंत्री आवास घेराव का प्रयास
रांची, 11 जून (हि.स.)।
नगड़ी की उपजाऊ कृषि भूमि पर प्रस्तावित रिम्स-2 के निर्माण के विरोध में गुरुवार को आदिवासी समाज, किसानों और ग्रामीणों ने पदयात्रा निकालकर मुख्यमंत्री आवास घेराव का प्रयास किया। हालांकि मोरहाबादी क्षेत्र में पुलिस प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।
इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता सड़क पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को दोहराया।
प्रदर्शन में नगड़ी और आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जिस भूमि पर रिम्स-2 निर्माण की योजना बनाई गई है, वह अत्यंत उपजाऊ कृषि भूमि है और वर्षों से स्थानीय किसानों की आजीविका का प्रमुख आधार रही है। उनका आरोप है कि अस्पताल निर्माण से कृषि गतिविधियां प्रभावित होंगी और अनेक किसान परिवारों के समक्ष आजीविका का संकट उत्पन्न हो जाएगा।
सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए मोरहाबादी में भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। बैरिकेडिंग के कारण पदयात्रा मुख्यमंत्री आवास तक नहीं पहुंच सकी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराया।
मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता बलकु उरांव ने कहा कि झारखंड आंदोलन के नेता दिवंगत शिबू सोरेन हमेशा कृषि योग्य भूमि की रक्षा के पक्षधर रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार उनके सिद्धांतों के अनुरूप कार्य नहीं कर रही है।
उन्होंने सरकार से किसानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए परियोजना के लिए वैकल्पिक भूमि चयन करने की मांग की।
सामाजिक कार्यकर्ता शीतल कच्छप ने कहा कि आंदोलन विकास विरोधी नहीं है। ग्रामीण किसी प्रकार का मुआवजा नहीं चाहते, बल्कि उनकी मांग है कि रिम्स-2 का निर्माण उपजाऊ कृषि भूमि के बजाय किसी अन्य उपयुक्त स्थल पर किया जाए।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि मांगों पर विचार नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
प्रदर्शन में बडी संख्या में ग्रामीण सहित अन्य लोग मौजूद थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

