home page

डॉ. करमा उरांव के विचारों और संघर्ष से प्रेरणा ले युवा पीढ़ी : शिल्पी

 | 
डॉ. करमा उरांव के विचारों और संघर्ष से प्रेरणा ले युवा पीढ़ी : शिल्पी


रांची, 24 अक्टूबर (हि.स.)। रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा विभाग के अखड़ा में डॉ. करमा उरांव की 74 वीं जयंती पर शनिवार को आयोजित समारोह में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि डॉ. करमा उरांव पारंपरिक आदिवासी सामाजिक व्यवस्था, पड़हा व्यवस्था, भाषा और संस्कृति के प्रबल समर्थक थे। उनका जीवन हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक शिक्षा और पारंपरिक ज्ञान के बीच संतुलन स्थापित करने की प्रेरणा देता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि समाज को जागरूक, संवेदनशील और नैतिक बनाना भी है।

वहीं पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने डॉ. करमा उरांव के संघर्ष और दूरदर्शिता को याद करते हुए कहा कि एकीकृत बिहार के समय उन्होंने लगभग 10 हजार विद्यार्थियों के साथ नेतरहाट का घेराव कर तत्कालीन मुख्यमंत्री को विद्यार्थियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने के लिए बाध्य किया था। रांची विश्वविद्यालय में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग की स्थापना की मांग भी उनके प्रमुख प्रयासों में शामिल थी।

उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को डॉ. करमा उरांव के विचारों और संघर्ष से प्रेरणा लेकर अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और सामाजिक व्यवस्था के संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए।

समारोह में रांची विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सरोज शर्मा, डॉ. हरी उरांव, प्रो. सुदेश कुमार साहू, डॉ. रविंदर भगत, प्रो. मुकुल चंद मेहता, डॉ. प्रकाश उरांव, प्रो. एसएन. शाहदेव एवं डॉ. स्मृति सिंह सहित अन्य गणमान्य लोगों ने भी अपने विचार साझा किए।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak