एमएमडीआर संशोधन राज्य और राष्ट्रहित में, झामुमो-कांग्रेस फैला रहे भ्रम : रघुवर दास
रांची, 26 अगस्त (हि.स.)। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से हाल में लाया गया खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (एमएमडीआर) राज्य और राष्ट्रहित में है। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस संशोधन की गलत व्याख्या कर लोगों के बीच भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं।
रघुवर दास बुधवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि एमएमडीआर संशोधन झारखंड के हितों के खिलाफ नहीं, बल्कि राज्य को उसकी खनिज संपदा का अधिकतम लाभ दिलाने और वैध खनन को पारदर्शी बनाने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि झामुमो-कांग्रेस के संरक्षण में धनबाद, बोकारो, चतरा, हजारीबाग, साहेबगंज, दुमका और शिकारीपाड़ा समेत कई क्षेत्रों में कोयला, बालू और पत्थर के अवैध कारोबार से जुड़े सिंडिकेट सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान ‘जल, जंगल, जमीन’ की बात कर सत्ता में आने वाले लोगों ने सत्ता संभालने के बाद राज्य के प्राकृतिक संसाधनों को कथित रूप से सिंडिकेट के हवाले कर दिया। उन्होंने वर्तमान सरकार पर झारखंड के खनिज संसाधनों की लूट को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
रघुवर दास ने पत्थर के अवैध खनन से जुड़े मामलों में झामुमो के नेताओं और सरकार के एक मंत्री के जेल जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसे दलों से एमएमडीआर संशोधन पर किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री दास ने कहा कि मौजूदा विवाद केवल 11 हजार करोड़ रुपये के उपकर (सेस) तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या वित्तीय अनिश्चितता का माहौल बनाकर राज्य में आने वाले बड़े निवेश, उत्पादन, रोजगार और औद्योगिक विकास की संभावनाओं को प्रभावित किया जाए। उन्होंने दावा किया कि खनन क्षेत्र से मिलने वाले कुल कर और वैधानिक भुगतानों का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा सीधे राज्यों को मिलता है और यह व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी।
रघुवर दास ने कहा कि केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने 2015 में रॉयल्टी के अलावा खनन प्रभावित जिलों के विकास के लिए जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) के माध्यम से अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराने की व्यवस्था की थी। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज, डीएमएफटी और राज्य की वैध खनिज आय की पर्याप्त सुरक्षा होनी चाहिए तथा खनिज संपदा का वास्तविक लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचना चाहिए।
दास ने आरोप लगाया कि डीएमएफटी की राशि का पर्याप्त उपयोग नहीं हो रहा है। उनके अनुसार, डीएमएफटी के कुल 18,250 करोड़ रुपये के संग्रह में से 7,915 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अब भी खर्च नहीं हुई है, जबकि 2,487 परियोजनाएं ठप या रद्द हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि धनबाद में 2,393.58 करोड़ रुपये, चाईबासा में 1,802.82 करोड़, चतरा में 1,055.40 करोड़, पाकुड़ में 527.88 करोड़ और रामगढ़ में 518.82 करोड़ रुपये की डीएमएफटी राशि खर्च नहीं की गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में अस्पतालों में पर्याप्त उपकरण और दवाएं नहीं हैं, एंबुलेंस की कमी है तथा लोगों को स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने डीएमएफटी से जुड़ी कुछ योजनाओं में कथित अनियमितताओं की भी जांच की मांग उठाई।
रघुवर दास ने राज्य सरकार पर खनन क्षेत्र से राजस्व बढ़ाने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से राज्य में 34 कोल ब्लॉक चालू करने की मंजूरी मिलने के बावजूद अब तक केवल चार कोल ब्लॉक ही चालू हो पाए हैं, जबकि 30 ब्लॉक अब भी शुरू नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह लौह अयस्क की 15 में से छह और बॉक्साइट की 37 में से 17 खदानें ही चालू हैं। यदि बाकी खदानें और कोल ब्लॉक समय पर चालू होते तो राज्य को बड़े पैमाने पर राजस्व प्राप्त हो सकता था।
दास ने कहा कि झामुमो-कांग्रेस सरकार 11 हजार करोड़ रुपये के सेस को लेकर चिंता जता रही है, लेकिन खनन राजस्व के आंकड़े राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि समान खनिज संपदा होने के बावजूद ओडिशा ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 60 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य रखा, जबकि झारखंड का लक्ष्य 18,844 करोड़ रुपये है। उन्होंने दावा किया कि ओडिशा की तेज नीलामी और खदान संचालन प्रक्रिया के कारण उसकी राजस्व दक्षता झारखंड की तुलना में करीब तीन गुना अधिक है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध खनन के कारण वैध खनन और राज्य के राजस्व को नुकसान हो रहा है। उन्होंने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 की अप्रैल-जुलाई अवधि में कोयले का उत्पादन 44.78 मिलियन टन था, जो 2025-26 की इसी अवधि में घटकर 37.25 मिलियन टन रह गया।
उन्होंने कहा कि जब वैध खनन कम होगा तो राज्य का वैध राजस्व भी प्रभावित होगा। सरकार को अवैध खनन पर रोक लगाने, लंबित खदानों को जल्द शुरू कराने और डीएमएफटी की राशि का पारदर्शी एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए।
रघुवर दास ने दोहराया कि खनिज संपदा का लाभ राज्य और स्थानीय जनता तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि एमएमडीआर संशोधन को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय इसके व्यापक आर्थिक प्रभाव, निवेश, रोजगार और पारदर्शी खनन की संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

