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फूलो-झानो का नाम मिटाना आदिवासी समाज का अपमान : चंपाई

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फूलो-झानो का नाम मिटाना आदिवासी समाज का अपमान : चंपाई


दुमका, 29 मई (हि.स.)। फूलो-झानो मेडिकल काॅलेज के नाम बदलने पर राजनीतिक गरमा गई है। पूर्व में विभिन्न छात्र संगठनों के विरोध के बावजूद मेडिकल काॅलेज से शहीद फूलो-झानों मुर्मू का नाम हटाने का मामला गहराता जा रहा है। फूलो-झानो मेडिकल कॉलेज का नाम बदलकर गवर्नमेंट हॉस्पिटल एंड मेडिकल कॉलेज किए जाने के मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने राज्य के हेमंत सरकार पर हमला बोला है।

दुमका दौरे के दौरान मेडिकल कॉलेज पहुंचे चम्पाई सोरेन ने कहा कि यह आदिवासी महापुरुषों और वीरांगनाओं के सम्मान को मिटाने की साजिश है।

उन्होंने कहा कि किसी संस्थान से महापुरुषों का नाम हटाना समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है। उन्होंने कहा कि अबुआ सरकार आदिवासी इतिहास और संस्कृति को कमजोर करने का काम कर रही है। जिसे समाज कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।

चम्पाई सोरेन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 30 जून तक मेडिकल कॉलेज के नाम में दोबारा फूलो-झानो नहीं जोड़ा गया, तो आदिवासी समाज के हजारों लोग खुद पहुंचकर नाम सुधार देंगेे। इस दौरान उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार आदिवासी परंपराओं और संस्कृति के संरक्षण के लिए काम कर रही है। यूसीसी से आदिवासी समाज को बाहर रखने की बात भी कही गई है।

उल्लेखनीय है कि मेडिकल काॅलेज स्थापनाकाल से ही शहीद फुलो-झामो मुर्मू मेडिकल काॅलेज के नाम से जाना जाता रहा है। वर्तमान में स्वतंत्रता सेनानी फुलो-झानों का नाम हटा कर गवर्नमेंट हॉस्पिटल और मेडिकल काॅलेज कर दिया गया है। इससे स्थानीय लोगों सहित विभिन्न छात्र संगठनों में नाराजगी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / नीरज कुमार