देवेंद्र नाथ महतो को झंडा फहराने से रोके जाने के मामले में सरकार से जवाब मांगेंगे विधायक जयराम महतो
रांची, 15 अगस्त (हि.स.)। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के छात्र-अभ्यर्थियों की ओर से स्वतंत्रता दिवस पर शनिवार को जयपाल सिंह स्टेडियम में आयोजित झंडोत्तोलन कार्यक्रम में शामिल होने से छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो और उनके साथियों को कथित तौर पर रोके जाने तथा धक्का-मुक्की एवं अभद्रता के मामले में विधायक जयराम महतो ने सरकार और राज्यपाल से जवाब मांगने की बात कही है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को सदन में भी उठाया जाएगा।
जयराम महतो ने सदर अस्पताल में इलाजरत देवेंद्रनाथ महतो से वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत की। इस दौरान महतो ने उन्हें पूरी घटना की जानकारी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस जवानों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की। उन्होंने यह भी बताया कि उनके एक साथी को पुलिस जवानों ने इस तरह धक्का दिया कि थोड़ी सी चूक होने पर उसका सिर फूट सकता था।
जयराम महतो ने कहा कि पुलिस के इस रवैये पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोकतंत्र में ऐसी घटना की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने सवाल किया कि पुलिस जवान किसके निर्देश पर इस तरह की कार्रवाई कर रहे थे और क्या राष्ट्रीय ध्वज फहराना तथा तिरंगा यात्रा में शामिल होना अपराध है।
उन्होंने कहा कि वह पूरे मामले को मुख्यमंत्री और राज्यपाल के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने घटना को स्वतंत्र भारत के लिए शर्मनाक तस्वीर करार दिया।
जयराम महतो ने कहा कि देवेंद्रनाथ महतो 14वें दिन भी भूख हड़ताल पर हैं। इसके बावजूद उन्हें तिरंगा यात्रा में शामिल होने से रोका गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देवेंद्रनाथ महतो पुलिस हिरासत में हैं या उन्हें नजरबंद रखा गया है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या झारखंड में राष्ट्रीय ध्वज फहराना और तिरंगे के सम्मान में यात्रा निकालना अपराध है। साथ ही उन्होंने सवाल किया कि क्या झारखंड एक दमनकारी पुलिस राज्य में परिवर्तित हो गया है।
वहीं, देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि 14 दिनों से भूख हड़ताल पर रहने के बावजूद उन्होंने स्वतंत्रता दिवस पर केवल झंडा फहराने और तिरंगा यात्रा में शामिल होने की इच्छा जताई थी। उनका आरोप है कि इसके बावजूद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में उनके साथ आक्रामक रवैया अपनाया गया। उन्होंने दावा किया कि उनके साथियों के साथ भी धक्का-मुक्की की गई और उन्हें जमीन पर गिराया गया।
महतो ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सरकार और देश को इस घटना पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भगवान बिरसा मुंडा, शहीद भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, खुदीराम बोस, चंद्रशेखर आजाद, महात्मा गांधी और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के सपनों का आजाद भारत यही है। उन्होंने कहा कि इन सवालों का जवाब सरकार और देश को देना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

