झामुमो अध्यक्ष के निर्देश पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने छात्रों पर बोला था हमला: चंपाई
रांची, 22 अगस्त (हि.स.)। 21 अगस्त को मुख्यमंत्री के पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान छात्रों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार और लाठीचार्ज के विरोध में पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपाई सोरेन ने हेमंत सोरेन सरकार पर जमकर निशाना साधा है।
चंपाई सोरेन ने आरोप लगाया कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष के निर्देश पर ही पार्टी कार्यकर्ताओं ने संवैधानिक तरीके से आंदोलन कर रहे छात्रों पर हमला बोला था। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल छात्रों के आंदोलन को दबाने की कोशिश नहीं, बल्कि झारखंड में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की परंपरा के लिए भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
शनिवार को सोरेन प्रेस वार्ता में बोल रहे थे। चंपई सोरेन ने आरोप लगाया कि गठबंधन की वर्तमान सरकार पिछले 7 वर्षों से सत्ता में है लेकिन एक भी नियुक्ति पारदर्शिता के साथ नहीं करा पायी। छात्र चाहते थे कि सभी विवादित परीक्षाओं की जांच सीबीआई से हो लेकिन सरकार ने उनके साथ धोखेबाजी कर दी। एक साजिश रच कर 22 परीक्षाओं को रद्द कर दिया लेकिन सरकार का फैसला कोर्ट में नहीं टिक पाया। इसी से सरकार की मंशा का पता चलता है, सरकार ऐसी घोषणा कर छात्रों को आपस में लड़ाना चाहती थी।
चंपाई सोरेन ने कहा कि अपनी गलती छुपाने के लिए सत्ताधारी लोग आरोप लगा भाजपा पर आरोप लगा रहे हैं लेकिन सरकार जानती है कि यह कोई राजनीतिक आंदोलन नहीं था। जिस तरह से रांची, गिरिडीह और हजारीबाग में आंदोलन कर रहे छात्रों पर लाठी बरसाई गईं, उसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है।
चंपाई सोरेन ने राजस्थान में एसआई नियुक्ति रिजल्ट पर आए उच्चतम न्यायालय के फैसले का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि ग्लास में दो बूंद भी जहर है तो उसे फेंकना ही पड़ेगा लेकिन यहां की सरकार नियुक्ति परीक्षा में पारदर्शिता चाहती ही नहीं है, क्योंकि यहां नौकरी बेची जाती है। बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि झारखंड की सरकार ने एक तानाशाह की सारी हदें लांघ दी है। इस सरकार में छात्रों को न्याय मिलने की कोई जगह नहीं दिख रही है।
उन्होंने कहा कि जब वे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर थे, उसी समय सीजीएल परीक्षा में गड़बड़ी की बात सामने आई थी। उन्होंने एसआईटी जांच अभी आदेश दिया था लेकिन रिपोर्ट आने से पहले ही उनको कुर्सी छोड़नी पड़ी। वर्तमान सरकार गड़बड़ी पर पर्दा डाल रही है। उन्होंने कहा कि दिल तो चाहता है कि यहां राष्ट्रपति शासन लगना चाहिए क्योंकि यहां भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने जेपीएससी और जेएसएससी की नियुक्ति परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि जेपीएससी संवैधानिक संस्था है और सरकार ने ही इसके पदाधिकारियों की नियुक्ति की है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। चंपाई सोरेन ने कहा कि 21 अगस्त की घटना से झारखंड के लिए गलत संदेश गया है। लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों पर बल प्रयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन का मूल उद्देश्य युवाओं को रोजगार और अधिकार दिलाना था लेकिन वर्तमान सरकार उस उद्देश्य से भटक गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

