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झारखंड में सरकार का अधिकारियों पर नियंत्रण खत्म हो रहा : प्रदीप सिन्हा

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झारखंड में सरकार का अधिकारियों पर नियंत्रण खत्म हो रहा : प्रदीप सिन्हा


झारखंड में सरकार का अधिकारियों पर नियंत्रण खत्म हो रहा : प्रदीप सिन्हा


रांची, 21 जुलाई (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने झारखंड की गठबंधन सरकार पर प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में अधिकारियों पर सरकार का नियंत्रण लगभग समाप्त हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि इसका परिणाम प्रशासनिक अनुशासन में गिरावट, जवाबदेही की कमी और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के रूप में सामने आ रहा है।

मंगलवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदीप सिन्हा ने कहा कि राज्य के वरिष्ठ मंत्रियों के निर्देशों की अनदेखी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार अपने ही प्रशासनिक तंत्र पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने में असफल है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी के साथ देवघर के पुलिस अधीक्षक के कथित व्यवहार ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू द्वारा किए गए फोन का अधिकारियों ने जवाब तक नहीं दिया। उनके अनुसार, यह अधिकारियों के गैर-जिम्मेदार रवैये को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती।

प्रदीप सिन्हा ने कहा कि यह पहला अवसर नहीं है जब प्रशासन के दुरुपयोग के आरोप लगे हों। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश के खिलाफ देशद्रोह जैसा गंभीर मुकदमा दर्ज कराया गया था, जिसे उन्होंने राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण बताया। उनके अनुसार, आज भी उसी प्रकार की मानसिकता प्रशासनिक कार्यप्रणाली में दिखाई दे रही है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान ने विधायिका और कार्यपालिका दोनों के अधिकारों एवं दायित्वों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया है। जनप्रतिनिधि जनता की समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों से संवाद करते हैं, इसलिए अधिकारियों का दायित्व है कि वे संवैधानिक मर्यादा, जवाबदेही और शिष्टाचार का पालन करें। यदि अधिकारी जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा करेंगे तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होगी और आम जनता का विश्वास भी प्रभावित होगा।

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि पिछले लगभग एक महीने से राज्य के मंत्रियों और अधिकारियों के बीच चल रही कथित खींचतान पर मुख्यमंत्री की चुप्पी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि राज्य में प्रशासन सरकार के निर्देशों के अनुसार चलेगा या अधिकारियों की मनमानी के आधार पर। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री का मौन प्रशासनिक अव्यवस्था को अप्रत्यक्ष संरक्षण देने जैसा है।

प्रदीप सिन्हा ने राज्य सरकार से प्रशासनिक अनुशासन बहाल करने, अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों के सम्मान की रक्षा के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की।

प्रेस वार्ता में भाजपा प्रदेश मीडिया विभाग के सह-संयोजक अजय राय और नीरज सिंह भी उपस्थित थे।-------------

हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे