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रांची विवि के 67वें स्थापना दिवस पर कुलपति बोले-विवि आयोग हमारी हर जरूरतों की करे पूर्ति

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रांची विवि के 67वें स्थापना दिवस पर कुलपति बोले-विवि आयोग हमारी हर जरूरतों की करे पूर्ति


रांची विवि के 67वें स्थापना दिवस पर कुलपति बोले-विवि आयोग हमारी हर जरूरतों की करे पूर्ति


विश्वविद्यालय के गौरवशाली परंपरा को हम ले जायेंगे आगे : कुलपति सरोज शर्मा

रांची, 10 जुलाई (हि.स.)। रांची विश्वविद्यालय का 67वां तीन दिवसीय स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ आर्यभट्ट सभागार में शुक्रवार को शुरू हुआ। इस अवसर पर रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सरोज शर्मा और सभी वरीय पदाधिकारियों ने द्वीप प्रज्जवलित कर और पीएफए विभाग के छात्रों के राष्ट्रगीत एवं कुलगीत की प्रस्तुति से कार्यक्रम 'प्रारम्भ' हुआ। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सरोज शर्मा ने कहा कि मुझे अब पूरी उम्मीद है कि नवगठित विवि आयोग आरयू की हर प्रकार के आवश्यकताओं को पूरा करेगा। यह तीन दिवसीय समारोह निश्चित रूप से मील का पत्थर साबित होगा। कुलपति ने कहा कि 1960 में झारखंड क्षेत्र में स्थापित रांची विश्वविद्यालय की यात्रा बहुत ही गौरवशाली रही है और इसकी परंपरा शिक्षण के क्षेत्र में योगदान अप्रतिम रहा है। यहां विद्वान शिक्षकों की एक परंपरा रही है, जिन्होंने विद्यार्थियों और युवाओं को हमेशा निखारने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि हमने एनएसएस, खेल और अकादमिक क्षेत्रों में बहुत अच्छा किया है। हमने भारतीय ज्ञान परंपरा को आरयू में लागू किया है। यह गर्व की बात है कि एनइपी 2020 के अनुसार रांची विवि का पहले बैच के हमारे विद्यार्थी जल्द ही उत्तीर्ण होकर कर निकलेंगे। विश्वविद्यालय के गौरवशाली परंपरा को हम ले जायें आगे कुलपति ने कहा कि हमारा यह दायित्व है कि इस गौरवशाली परंपरा को आगे ले जायें। रांची युनिवर्सिटी में 16 लाख विद्यार्थी एनरोल हैं। यहां हमें इक्वेलिटी के साथ क्वालिटी एजुकेशन देना है। कार्यक्रम में पीएफए विभाग के विपुल नायक की टीम की ओर से रांची विश्वविद्यालय के 1960 से 2025 तक की यात्रा को कोरियोग्राफी 'मैं हूं रांची विश्वविद्यालय' के माध्यम से भव्य प्रस्तुति दी गयी। जिसे देखकर सभागार के सभी दर्शक अभिभूत हो गये।

वहीं टीआरएल के नागपुरी विभाग के छात्र—छात्राओं ने करसा नृत्य की मोहक प्रस्तुति दी। नरेन्द्र भगत 1960 से ही आरयू से जुड़े विशिष्ट अतिथि नरेन्द्र भगत (सेवानिवृत आइएस और रांची विश्वृविद्यालय के पूर्व रजिस्ट्रार) ने स्थापना दिवस पर अपनी यादों को साझा किया। उन्होंने सबको शुभकामनाएं देते हुते कहा कि रांची विवि ने कई संस्थाओं को पुष्पित पल्लवित किया है, जिसमें रिम्स और बीएयू जैसे संस्थान हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व में एथ्रोपोलोजी और साइकोलोजी की भी बहुत ख्याति थी।

कार्यक्रम में रांची विश्वविद्यालय के डीएसडबल्यू डॉ सुदेश कुमार साहु ने रांची विश्वविद्यालय की विशिष्टता और उपलब्धियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि रांची विश्वविद्यालय पठन-पाठन के अलावा खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी अग्रणी है। अभी हमने इस्ट जोन फुटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन किया था जिसमें हम विजेता रहे। इस अवसर पर फुटबॉल टीम के सभी खिलाड़ियों को मंच पर कुलपति ने सम्मानित किया। वहीं राष्ट्रपति की ओर से सम्मानित आरयू के तीन छात्रों दिवाकर आनंद, फलक फातिमा और दीक्षा कुमारी को भी मंच पर कुलपति ने सम्मानित किया। पहले दिन के कार्यक्रम का संचालन सीवीएस की डिप्टि डायरेक्टर डॉ स्मृति सिंह और डॉ किशोर सुरीन ने किया।

इस अवसर पर कार्यक्रम में पूर्व कुलपति प्रो एए खान, प्रो कामिनी कुमार, प्रो अजीत कुमार सिन्हा, डीएसडब्ल्यू, सीसीडीसी, परीक्षा नियंत्रक, रजिस्ट्रार, प्रॉक्टर, सभी संकायाध्यक्ष विभिन्न विभागों के हेड प्राध्यापक सहित अन्य अतिथि उपस्थित थे। कार्यक्रम के दूसरे दिन 11 जुलाई को कला दिवस के रूप में मनाया जायेगा। वहीं 12 जुलाई को हरित विथीका का आयोजन होगा। यह दोनों आयोजन शहीद चौक स्थित मुख्य प्रशासनिक भवन में होंगे, जिसमें परिसर की दीवारों पर सोहराई पेंटिंग से लेकर पौधारोपण के कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak