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खतरे की घंटी बजा रहे कोयले के पुराने खदान : जीपी

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खतरे की घंटी बजा रहे कोयले के पुराने खदान : जीपी


रामगढ़, 23 जून (हि.स.)। झारखंड में कोयले के पुराने खदान और गड्ढे खतरे की घंटी बजा रहे हैं। रामगढ़ जिला भी सीसीएल का क्षेत्र है। यहां भी बरसात में पानी से भरे पुराने खदान और गड्ढे जानलेवा बन चुके हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकारी अधिवक्ता संजीव कुमार अम्बष्ठ ने कोल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर पूरे देश में तत्काल सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की है। उन्होंने बयान जारी कर कहा कि लातेहार जिले के मगध कोयला परियोजना में खदान में भरे पानी में तीन बच्चों की मौत हृदय विदारक है। ऐसी घटनाएं रामगढ़ जिले के खदानों में भी पहले घट चुकी है।

लातेहार में द्वारिका गंझू के तीन मासूम बच्चों की मौत ने पूरे क्षेत्र को शोकाकुल कर दिया है। इससे एक बार फिर खनन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर कमी उजागर हुई है। बरसात के मौसम में कोयला खदानों के कई पुराने, बंद पड़े खदानों के गड्ढों में पानी भर जाता है। बाहर से ये सामान्य तालाब जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन वास्तव में अत्यंत गहरे और खतरनाक होते हैं। अनजान बच्चे, ग्रामीण, पशु चराने वाले लोग तथा मवेशी इन गड्ढों में आकर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।

रामगढ़ जिले में बंद परे खदानों एवं असुरक्षित खदान क्षेत्रों में कई गंभीर दुर्घटनाएं हुई हैं। हाल ही में रामगढ़ के अरगड्डा क्षेत्र में एक बंद खदान में जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण चार लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा रामगढ़ मे खदान धंसने और खदान क्षेत्र में गिरने जैसी घटनाओं में भी कई लोगों की जान जा चुकी है।

उन्होंने मांग की है कि सभी बंद एवं खुला खदानों की तत्काल पहचान की जाए। खतरनाक गड्ढों को भरकर सुरक्षित बनाया जाए। जहां गड्ढों को भरना संभव नहीं हो, वहां मजबूत घेराबंदी की जाए। चेतावनी बोर्ड स्थानीय भाषाओं में लगाए जाएं।

रात्रि में भी खतरे के संकेत स्पष्ट दिखाई दें, इसके लिए सोलर लाइट की व्यवस्था की जाए। संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाएं।नियमित सुरक्षा ऑडिट एवं निरीक्षण किया जाए। गांवों, स्कूलों एवं आदिवासी बस्तियों में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए।

बचाव उपकरण एवं प्रशिक्षित राहत दल उपलब्ध रखे जाएं।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश