home page

बैंकों में हिंदी के उपयोग की संसदीय राजभाषा समिति ने की समीक्षा

 | 
बैंकों में हिंदी के उपयोग की संसदीय राजभाषा समिति ने की समीक्षा


देवघर, 24 अक्टूबर (हि.स.)। बैंकों में हिंदी का इस्तेमाल केवल बोर्ड, फॉर्म और सूचनाओं तक सीमित है या ग्राहकों को रोजमर्रा के कामकाज में भी हिंदी में सहज सेवाएं मिल रही हैं, यह सवाल बैंकिंग व्यवस्था में राजभाषा के प्रभावी क्रियान्वयन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसी विषय को लेकर देवघर में संसदीय राजभाषा समिति की तीसरी उप-समिति का दो दिवसीय निरीक्षण एवं समीक्षा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छह राज्यों से जुड़े सांसदों ने भाग लिया। उप-समिति का नेतृत्व संयोजक और महाराष्ट्र के मावल से लोकसभा सांसद श्रीरंग अप्पा चंदू बारणे ने किया।

इंडियन बैंक के अंचल कार्यालय, देवघर के समन्वय से आयोजित कार्यक्रम में भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, इंडियन बैंक समेत विभिन्न बैंकों और संबंधित संस्थानों के अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान बैंकों में हिंदी के प्रयोग, राजभाषा संबंधी प्रावधानों के अनुपालन और सरकारी कामकाज में हिंदी के इस्तेमाल की स्थिति से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

बैंकों में हिंदी के प्रयोग का आकलन केवल हिंदी में लिखे बोर्ड, छपे प्रपत्र और उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसका वास्तविक महत्व तब सामने आता है, जब कोई ग्राहक अपनी समस्या हिंदी में रखता है और उसे उसी भाषा में आवश्यक जानकारी एवं समाधान मिलता है। पेंशनधारियों, किसानों, छोटे कारोबारियों और आम खाताधारकों के लिए बैंकिंग सेवाओं को सहज और सुलभ बनाने में भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

संसदीय राजभाषा समिति का निरीक्षण इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके माध्यम से संबंधित संस्थानों में हिंदी के प्रयोग की स्थिति, राजभाषा संबंधी निर्धारित लक्ष्यों के अनुपालन और कार्यान्वयन के दौरान आने वाली कठिनाइयों की समीक्षा की जाती है। कार्यालयी पत्राचार, कर्मचारियों का प्रशिक्षण और दैनिक कामकाज में हिंदी के इस्तेमाल जैसे विषय भी इस प्रक्रिया के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

कार्यक्रम के दौरान सांसद श्रीरंग अप्पा बारणे से देवघर और आदिवासी बहुल संताल परगना क्षेत्र में संथाली सहित क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए उठाए जा रहे कदमों के संबंध में सवाल किया गया। इस संदर्भ में भाषा के प्रति सम्मान और जागरूकता की आवश्यकता पर जोर दिया गया। सरकारी योजनाओं और बैंकिंग सेवाओं की जानकारी लोगों तक उनकी समझ में आने वाली भाषा में पहुंचाना जागरूकता बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / Anup Kumar Roy