कंप्यूटर की नई तकनीक से विद्यार्थियों में होगा गुणवत्तापूर्ण बदलाव : कुलपति
रामगढ़, 11 जून (हि.स.)। रामगढ़ कॉलेज में फैकेल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (संकाय विकास कार्यक्रम) के अंतिम दिन गुरुवार को कंप्यूटर की नई तकनीक पर चर्चा हुई। समापन समारोह को ऑनलाइन संबोधित करते हुए विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति सह कार्यक्रम के संरक्षक प्रोफेसर चंद्रभूषण शर्मा ने शिक्षा की नई तकनीक पर जोर देने को कहा।
उन्होंने कहा कि दुनिया काफी तेजी से बदल रही है। हम देश को तभी दौड़ में शामिल कर सकते हैं जब बच्चों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और तकनीक का समावेश हो सकें। जिन लोगों ने 80 के दशक में कंप्यूटर साइंस पढ़ा, आज वह काफी बेहतर जगह पर कार्य कर रहे हैं। लेकिन जितनी जल्दी हम एआई से काम लेना सीखेंगे उतना ही बेहतर तरीके से विद्यार्थियों को सीखा पाएंगे। उतनी ही जल्दी हमारे छात्र भी शिखर पर पहुंच पाएंगे। शिक्षकों में सिर्फ दो ही गुण हो सकते हैं कि वह कितना अच्छा बोल सकते हैं और कितना अच्छा लिख सकते हैं। अगर ज्ञानवर्धक बातों और एआई की सहायता से शिक्षा लाभदायक बनाई जा सकती है, तो इस पर भी शोध करने की आवश्यकता है। साथ ही उसे स्थानीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में प्रकाशित करने की आवश्यकता है।
वहीं मुख्य संसाधन सेवी के रूप में इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर टीचर एजुकेशन, वाराणसी के प्रो आशीष कुमार श्रीवास्तव ने अपने व्याख्यान में भारतीय उच्च शिक्षा की अकादमिक संस्कृति, सुशासन और शोध की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान की पहचान उसके शिक्षकों, कार्य संस्कृति, दृष्टि और मूल्यों से बनती है। बेहतर शासन का अर्थ अधिक नियंत्रण नहीं, बल्कि जवाबदेही के साथ स्वायत्तता है। उन्होंने कहा कि शासन केवल नियमों और फाइलों का विषय नहीं, बल्कि व्यवहार और नेतृत्व का प्रतिबिंब है। तकनीक अच्छे मानवीय संबंधों का विकल्प नहीं हो सकती और संस्थानों को बैठक संस्कृति और अनावश्यक औपचारिकताओं से बाहर निकलकर शोध, नवाचार और संकाय विकास पर ध्यान देना चाहिए।
डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने कहा कि नई शिक्षा नीति की सफलता सभी हितधारकों के सामूहिक सहयोग और समन्वय पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक, विद्यार्थी, प्रशासन और समाज मिलकर एक साझा उद्देश्य के साथ कार्य करेंगे, तभी शिक्षा व्यवस्था सही दिशा में आगे बढ़ेगी। प्रतिभागियों ने फीडबैक देते हुए इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर टीचर एजुकेशन, वाराणसी, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग और रामगढ़ कॉलेज का आभार व्यक्त किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश

