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झारखंडी अस्मिता और जल-जंगल-जमीन पर आधारित फिल्म ‘सहरिया द जंगल ऑफ वॉरियर’ 5 जून को होगी रिलीज

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झारखंडी अस्मिता और जल-जंगल-जमीन पर आधारित फिल्म ‘सहरिया द जंगल ऑफ वॉरियर’ 5 जून को होगी रिलीज


रांची, 23 मई (हि.स.)। झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जल-जंगल-जमीन और आदिवासी अस्मिता की पृष्ठभूमि पर आधारित बहुप्रतीक्षित नागपुरी फिल्म ‘सहरिया द जंगल ऑफ वॉरियर’ अब रिलीज के लिए पूरी तरह तैयार है। यह फिल्म आगामी 05 जून को झारखंड सहित देश के कुछ अन्य राज्यों के सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जाएगी।

यह जानकारी फिल्म की कलाकार रंजू मिंज ने शनिवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी। उन्होंने बताया कि यह फिल्म न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि इसमें समाज से जुड़े गंभीर मुद्दों को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

फिल्म का निर्माण रोशन उरांव के निर्देशन में तथा अनमोल खलखो के सहयोग से किया गया है। इसे बिट्स ऑफ मेलोडी प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले तैयार किया गया है। फिल्म के तकनीकी पक्ष को भी उच्च स्तर पर तैयार किया गया है, जिसमें डीआई और मास्टर प्राइम मिक्सिंग चंडीगढ़ (पंजाब) में की गई है।

फिल्म की कहानी झारखंड के ग्रामीण और आदिवासी जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें जल-जंगल-जमीन की रक्षा, सामाजिक संघर्ष और विशेष रूप से मानव तस्करी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) जैसे गंभीर और ज्वलंत मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है। इसके साथ ही फिल्म में झारखंड के वीर आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को भी विशेष रूप से दर्शाया गया है, जिससे यह फिल्म ऐतिहासिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण बन जाती है।

फिल्म के मुख्य कलाकारों में राजू तर्की, नितेश कच्छप, आशीष तिग्गा, भूषण नायक, रंजू मिंज, चांदनी बड़ाइक, एंजेल लकड़ा, प्रिया वर्मा, ईशा बड़ाईक और अंशु अग्रवाल शामिल हैं। वहीं नकारात्मक भूमिकाओं में सतीष सहदेव, दीपक लोहार और रवि राज ने अभिनय किया है। फिल्म का छायांकन धीरज डेनियल एवं सैम्यूल लकड़ा ने किया है, जबकि संपादन रे शर्मा द्वारा किया गया है।

रंजू मिंज ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में झारखंडी दर्शकों के बीच स्थानीय फिल्मों के प्रति रुचि और समर्थन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ऐसे समय में ‘सहरिया’ जैसी भव्य और विषय-प्रधान फिल्म का आगमन झॉलीवुड (झारखंडी फिल्म इंडस्ट्री) के लिए नई उम्मीद और उत्साह लेकर आया है।

उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड फिल्म इंडस्ट्री के लगभग 35 वर्षों के सफर में यह फिल्म एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है, क्योंकि इसमें संगीत, संवाद, सिनेमैटोग्राफी और कहानी का समन्वय दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने में सक्षम है।

फिल्म से जुड़े लोगों का मानना है कि ‘सहरिया’ झारखंडी भाषा और सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।------------

हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar