प्रधानमंत्री से दीपक प्रकाश ने आदिवासी कॉरिडोर के निर्माण का किया आग्रह
रांची,18 अप्रैल (हि.स.)। झारखंड की गौरवशाली परंपराओं को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान दिलाने को लेकर शनिवार काे झारखंड भाजपा के राज्यसभा सांसद सह बिहार के सह प्रभारी दीपक प्रकाश ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।
इस दौरान दीपक प्रकाश ने प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौंपकर देश की प्राचीनतम संस्कृति के संवाहक उरांव, मुंडा और संथाल आदिवासी समाज की अस्मिता, आस्था एवं उनकी सांस्कृतिक धरोहरों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया।
उन्होंने प्रधानमंत्री को मुंडा और उरांव जाति की गौरवशाली इतिहास उनकी वीरता, स्वाभिमान और संघर्ष अपनी संस्कृति, जल-जंगल-जमीन और अधिकारों की रक्षा, मांझी-पारगनैत एवं खुंटकट्टी जैसे पारंपरिक तंत्र सामाजिक संतुलन और सामुदायिक जीवन की सुदृढ़ नींव तथा उनकी पड़हा व्यवस्था के माध्यम से सामाजिक संगठन, न्याय एवं सामूहिक नेतृत्व के आदर्श के बारे में बताया।
प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान सांसद ने झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, आस्था एवं ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और विकास से जुड़े क्षेत्र पर कार्य करने की वकालत की।
इसमें विशेष रूप से रोहतास गढ़ किला, मुड़मा मेला और मरांग बुरु जैसे ऐतिहासिक एवं आस्था से जुड़े स्थलों के संरक्षण, विकास तथा इन्हें जोड़ते हुए आदिवासी सांस्कृतिक कॉरिडोर के निर्माण का आग्रह किया, ताकि गौरवशाली परंपराओं को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान मिल सके। साथ ही इन स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने की आवश्यकता पर भी ध्यान आकर्षित किया।
पीएम को सौंपे गए ज्ञापन में दीपक प्रकाश ने लिखा है कि उरांव समाज ने अपनी पड़हा व्यवस्था के माध्यम से सामाजिक संगठन, न्याय एवं सामूहिक नेतृत्व का जो आदर्श प्रस्तुत किया है, वह आज भी लोकतांत्रिक मूल्यों के मूल्यों के लिए प्रेरणास्रोत है। वहीं मुंडा समाज ने वीरता, स्वाभिमान एवं संघर्ष की अद्वितीय गाथाएं रचते हुए अपनी संस्कृति, जल-जंगल-जमीन और अधिकारों की रक्षा में सदैव अग्रणी भूमिका निभाई है। उनके मांझी-पारगनैत एवं खुंटकट्टी जैसे पारंपरिक तंत्र सामाजिक संतुलन और सामुदायिक जीवन की सुदृढ़ नींव हैं।
वहीं संथाल समाज के लिए मारंग बुरु (पारसनाथ पहाड़) सर्वोच्च आस्था का प्रतीक है, जो उनकी आध्यात्मिक चेतना एवं सांस्कृतिक पहचान का जीवंत केंद्र है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

