आदिवासी समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी में कटौती बर्दाश्त नहीं : शिल्पी
रांची, 24 अगस्त (हि.स.)। कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि परिसीमन के नाम पर आदिवासी समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी और आरक्षित सीटों में किसी भी प्रकार की कटौती स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपने अधिकारों के साथ-साथ राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संवैधानिक अधिकारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है।
शिल्पी नेहा तिर्की ने सोमवार को मांडर विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक कर 27 अगस्त 2026 को सभी जिला मुख्यालयों में चंदा चोरी और खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के विरोध में प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन और 30 अगस्त 2026 को रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित आदिवासी एकता महाजुटान रैली की तैयारियों की समीक्षा की।
इस दौरान पंचायत एवं बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने, अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने और व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने की रणनीति तय की गई।
विधायक ने कहा कि झारखंड की पहचान जल, जंगल और जमीन से जुड़ी है। आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं होने दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक प्रतिनिधित्व ही अधिकारों की सबसे मजबूत आवाज है। आदिवासी समाज के प्रतिनिधित्व को कमजोर करने की किसी भी कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से पुरजोर विरोध किया जाएगा। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से दोनों कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत के साथ जुटने तथा गांव-गांव और बूथ स्तर तक जनसंपर्क अभियान चलाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर कई लोग मौजूद थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

