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पर्युषण पर्व के सातवें दिन तीर्थंकरों के जीवन और संदेशों पर प्रवचन

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पर्युषण पर्व के सातवें दिन तीर्थंकरों के जीवन और संदेशों पर प्रवचन


पर्युषण पर्व के सातवें दिन तीर्थंकरों के जीवन और संदेशों पर प्रवचन


रांची, 14 सितंबर (हि.स.)। श्री श्वेतांबर जैन मंदिर, डोरंडा में पर्युषण पर्व के सातवें दिन सोमवार को धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सुबह 7:30 बजे से स्नात्र पूजा शुरू हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भाग लिया।

पर्युषण पर्व के सातवें दिन मुंबई से आए साधर्मी बंधु धैर्य पियूष भाई और तीर्थ धर्मवीर शाह ने प्रवचन किया। उन्होंने भगवान ऋषभदेव, भगवान पार्श्वनाथ, भगवान नेमीनाथ और भगवान महावीर के जीवन चरित्र, उनके शासनकाल तथा धार्मिक संदेशों के बारे में विस्तार से बताया। प्रवचन के दौरान उनके संदेशों का वाचन भी किया गया। वक्ताओं ने बताया कि इस काल में सबसे पहले मोक्ष प्राप्त करने वाली मरुदेवी माता थीं।

गिरनार की भावपूर्वक यात्रा

शाम को मंदिर परिसर में गिरनार की भावपूर्वक यात्रा कराई गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने गिरनार स्थित भगवान नेमीनाथ के दर्शन की अनुभूति की। बताया गया कि वर्तमान में मौजूद प्रतिमाओं में सबसे प्राचीन प्रतिमा गिरनार में है। गिरनार तीर्थ के विकास और संरक्षण में वास्तुपाल, तेजपाल तथा राजा संप्रति के योगदान का भी उल्लेख किया गया।

इसके बाद आरती और भक्ति भजनों का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान वारसॉ सूत्र का चढ़ावा भी किया गया। मंगलवार को पर्युषण पर्व के अंतिम दिन वारसॉ सूत्र का वाचन किया जाएगा।

पर्युषण के अंतिम दिन समाज के लोग कर्मों की निर्जरा के लिए दिनभर धार्मिक अनुष्ठान और उपवास करेंगे। दोपहर 3:30 बजे से सामूहिक सामायिक प्रतिक्रमण का आयोजन किया जाएगा।

कार्यक्रम में सम्पतलाल रामपुरिया, सुभाष बोथरा, सुरेश बोथरा, सुशीला सेठिया, सुमन बोथरा, प्रेमलता नाहटा, उषा सेठिया, संजय नाहटा, प्रमोद बोथरा, उषा कोठारी सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।-------------

हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak