जेपीएससी अभ्यर्थी सबिता कुमार का छलका दर्द, आमरण अनशन के चौथे दिन फफककर रो पड़ीं
- भर्ती परीक्षाओं में कथित सेटिंग और पैसों के लेन-देन का लगाया आरोप
रांची, 07 अगस्त (हि.स.)। आंदोलन के चौदहवें दिन झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की तैयारी और सरकारी नौकरी का सपना लेकर वर्ष 2019 में रांची आईं अभ्यर्थी सबिता कुमार शुक्रवार को अपने संघर्ष और भविष्य की चिंता को लेकर भावुक हो उठीं। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित आंदोलन स्थल पर आमरण अनशन के चौथे दिन अपनी आपबीती सुनाते-सुनाते वह फफक-फफककर रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष और लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के बावजूद नौकरी नहीं मिलने से अब उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आगे जीवन में क्या करें।
सबिता ने बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। घर में पढ़ाई के लिए अलग से जगह तक उपलब्ध नहीं थी। वर्ष 2019 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी नौकरी का सपना लेकर वह रांची आईं। यहां पढ़ाई जारी रखने के साथ छोटे-मोटे काम कर अपना खर्च चलाया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ी।
उन्होंने बताया कि उन्होंने पूरी मेहनत और समर्पण के साथ जेपीएससी की परीक्षा दी। इसके अलावा कई अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी शामिल हुईं। प्रत्येक परीक्षा के बाद उन्हें उम्मीद रहती थी कि इस बार सफलता मिलेगी, लेकिन परिणाम आने के साथ उनकी उम्मीद टूटती चली गई। वर्षों तक लगातार मेहनत करने के बावजूद नौकरी नहीं मिलने से वह आर्थिक और सामाजिक दबाव का सामना कर रही हैं।
भावुक होते हुए सबिता ने कहा, “अब समझ नहीं आता कि घर किस मुंह से जाऊं। न जी पा रही हूं और न मर सकती हूं।” उन्होंने कहा कि शादी की उम्र निकल जाने को लेकर भी उन्हें समाज और आसपास के लोगों के ताने सुनने पड़ते हैं। लगातार पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी के बावजूद नौकरी नहीं मिलने से वह मानसिक दबाव में हैं और उन्हें भविष्य को लेकर कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है।
सबिता ने आरोप लगाया कि लगभग हर भर्ती परीक्षा के दौरान और परिणाम जारी होने से पहले अभ्यर्थियों के बीच कथित तौर पर सेटिंग और पैसों के लेन-देन की चर्चाएं होती रही हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग विभिन्न सरकारी पदों पर चयन कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये की मांग करते थे। उनके अनुसार, कुछ कथित दलाल 35 से 40 लाख रुपये देने पर सीधे पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) बनवाने का दावा करते थे और ऊपर तक सेटिंग होने की बात कहते थे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले अभ्यर्थियों के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना संभव नहीं है। यदि भर्ती प्रक्रिया में इस तरह की कथित अनियमितताएं होती हैं तो मेहनत और योग्यता के आधार पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित होता है।
सबिता ने राज्य सरकार से भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जांच ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों से कराई जानी चाहिए, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कथित अनियमितताओं में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी मांग की।
उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार और बेहतर भविष्य का भरोसा देकर सत्ता में आई सरकार को अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में युवाओं के कई वर्ष निकल जाते हैं और आर्थिक व मानसिक संघर्ष के बाद भी यदि भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो इसका सबसे अधिक नुकसान अभ्यर्थियों को ही उठाना पड़ता है।
सबिता ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर अभ्यर्थियों की चिंताओं का समाधान नहीं किया जाता, तब तक वह आमरण अनशन समाप्त नहीं करेंगी। आंदोलन स्थल पर मौजूद अन्य अभ्यर्थियों ने भी उनकी मांगों का समर्थन करते हुए भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की।
-----------
हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

