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कृषि के साथ पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन को जोड़ना जरूरी : अशाेक भगत

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कृषि के साथ पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन को जोड़ना जरूरी : अशाेक भगत


गुमला, 20 अप्रैल (हि.स.)। कृषि विज्ञान केंद्र गुमला,विकास भारती बिशुनपुर की ओर से संचालित संस्थान में सोमवार को 18वीं कृषि वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक हुई।

इस मौके पर मुख्य अतिथि पद्मश्री अशोक भगत ने अपने संबोधन में समेकित खेती प्रणाली पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन और अन्य गतिविधियों को जोड़ना चाहिए। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और जोखिम कम होगा। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ खेती अपनाने की जरूरत पर भी जोर दिया।

बैठक में जिले में कृषि एवं उससे जुड़े क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की समीक्षा तथा आगामी वर्ष 2026-27 के लिए व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक कार्ययोजना को तैयार किया गया। बैठक के प्रथम चरण में वर्ष 2025-26 के दौरान किए गए कार्यों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया।

बैठक के दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्र की स्थिति पर प्रकाश डाला। कृषि विभाग ने उन्नत बीज और उर्वरक की उपलब्धता, पशुपालन विभाग ने दुग्ध उत्पादन वृद्धि एवं पशु स्वास्थ्य प्रबंधन,मत्स्य विभाग ने तालाब आधारित मत्स्य उत्पादन तथा भूमि संरक्षण विभाग ने जल एवं मृदा संरक्षण पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

विशिष्ट अतिथि डॉ अवनी कुमार सिंह ने कहा कि कृषि को लाभकारी बनाने के लिए वैज्ञानिक जानकारी को सीधे किसानों तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार खेती की तकनीक अपनाने पर बल दिया।

डॉ निरंजन लाल ने कहा कि किसानों को समय पर सही जानकारी मिलना ही कृषि विकास की सबसे बड़ी कुंजी है। इंजीनियर एसके पांडेय ने खेती में आधुनिक यंत्रों के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि छोटे किसानों के लिए साझा मशीन उपयोग केंद्र बहुत उपयोगी हो सकते हैं। डॉ संजय पाण्डेय ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों के लिए मार्गदर्शक संस्था है और इसे और मजबूत बनाने की जरूरत है।

इधर, बैठक के दूसरे चरण में वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें सभी विभागों ने अपने सुझाव दिए। योजना में किसानों के लिए अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम, नई फसल किस्मों का प्रदर्शन, जैविक खेती को बढ़ावा, महिला एवं युवा किसानों के लिए विशेष कार्यक्रम तथा जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपायों को शामिल किया गया। इसके साथ ही किसानों को अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए प्रसंस्करण, भंडारण और बाजार से जोड़ने की व्यवस्था को भी मजबूत करने का प्रस्ताव रखा गया। यह भी निर्णय लिया गया कि गांव स्तर पर नियमित मार्गदर्शन एवं समस्या समाधान की व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा।

प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से दी गई तकनीकों को अपनाने से उनकी उत्पादन क्षमता एवं आय में वृद्धि हुई है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशिक्षण को और अधिक व्यवहारिक बनाया जाए तथा किसानों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखा जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / हरि ॐ सुधांशु सुधांशु