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मनरखन महतो बीएड कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन

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मनरखन महतो बीएड कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन


रांची, 08 मई (हि.स.)। मनरखन महतो बीएड कॉलेज में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन शुक्रवार को किया गया।

रांची के बीआईटी मोड नेवरी स्थित मनरखन महतो बीएड कॉलेज में शुक्रवार को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया।

सेमिनार के पहले दिन गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। सेमिनार का विषय सतत विकास के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्तारू नवाचार, चुनौतियां एवं भविष्य की दिशाएं रखा गया है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रांची विश्वविद्यालय, रांची की कुलपति प्रो (डॉ) सरोज शर्मा, मुख्य संरक्षक अध्यक्ष मनरखन महतो और अतिथियों ने सामूहिक रूप से द्वीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। स्वागत नृत्य (गणेश वंदना) ने उपस्थित सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम मे आए सभी अतिथियों को सम्मानित किया गया और सेमिनार स्मारिका और आईएसबीएन इनडेक्सड पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया, जो इस आयोजन की विशेष उपलब्धि रही।

कॉलेज के प्राचार्य डाॅ दूधेश्वर महतो की ओर से स्वागत भाषण प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने सेमिनार के उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डाला। इसके बाद मुख्य अतिथि प्रो (डॉ) सरोज शर्मा ने अपने संबोधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव और सतत विकास में इसकी भूमिका को विस्तार से स्पष्ट किया।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा दे रही : मनरखन

विभिन्न काॅलेज से आए सभी प्राचार्यो ने भी अपने-अपने विचार रखे जिनमें डॉ सपना त्रिपाठी, प्राचार्य, शहीद शेख भिखारी कॉलेज ऑफ एजुकेशनय डॉ मौसमी कुमार, प्राचार्य, फातिमा टीचर ट्रेनिंग कॉलेज, डॉ ज्योति वालिया, प्राचार्य, रामशोभा कॉलेज ऑफ एजुकेशनय तथा डॉ नाजिश नाज, सहायक प्राध्यापक, मदर जिरामनी टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज प्रमुख थे।

इस अवसर पर कॉलेज के अध्यक्ष मनरखन महतो ने कहा कि वर्तमान युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय सेमिनार शिक्षकों और विद्यार्थियों को नवीन ज्ञान और शोध के प्रति प्रेरित करते हैं और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करते हैं।

निदेशक मनोज कुमार महतो ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजनों से संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता में वृद्धि होती है। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में नवाचार को अपनाना समय की आवश्यकता है, जिससे शिक्षा को अधिक प्रभावी एवं समावेशी बनाया जा सके।

अंतरराष्ट्रीय कीनोट स्पीकर के रूप में मलेशिया के ग्लोबलनेक्स्ट यूनिवर्सिटी के डॉ दलविंदर कौर ने ऑनलाइन माध्यम से अपने विचार प्रस्तुत किए। वहीं राधा गोविंद विश्वविद्यालय, रामगढ़ की कुलपति डॉ रश्मि ने भी महत्वपूर्ण कीनोट व्याख्यान दिया।

दोपहर के भोजन के बाद नागपुरी नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी गई, जिसने कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भर दिया। इसके बाद सरला बिरला विश्वविद्यालय, रांची के निदेशक जनरल डॉ गोपाल पाठक और उषा मार्टिन विश्वविद्यालय के डॉ राजू कुमार ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम प्रथम में लगभग 450 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कर सक्रिय सहभागिता निभाई। यह सेमिनार शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।

इस दौरान ट्रस्टी विरेन्द्रनाथ ओहदार, खुशबू सिंह, कृति काजल, प्रबंधक मुकेश कुमार, प्रशासिका मीना कुमारी और पुनम कुमारी, काॅलेज के सभी शिक्षकगण, शिक्षकेत्तर कर्मचारी एवं प्रशिक्षु उपस्थित थे ।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak