विशेष गहन पुनरीक्षण केवल पात्र भारतीय नागरिकों के लिए, प्रवासी न लें भाग : के. रवि कुमार
रांची, 24 जून (हि.स.)। झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पात्र भारतीय नागरिकों का सत्यापन और पंजीकरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि भारत में रह रहे विदेशी नागरिक अथवा दूसरे देशों की नागरिकता प्राप्त कर चुके प्रवासी इस प्रक्रिया में भाग न लें। एसआईआर की पूरी प्रक्रिया त्रुटिरहित, पारदर्शी और समावेशी मतदाता सूची तैयार करने के लिए संचालित की जा रही है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी बुधवार को संथाल परगना दौरे के दूसरे दिन साहेबगंज जिले के सीमावर्ती प्रखंड बरहरवा स्थित प्लस-2 बरहरवा उच्च विद्यालय एवं सुदूरवर्ती आदिवासी बहुल प्रखंड सुंदर पहाड़ी में निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ईआरओ) स्तर पर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट-2 (बीएलए-2) के प्रशिक्षण कार्यक्रम का निरीक्षण कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की सहभागिता और मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया की समीक्षा की।
रवि कुमार ने कहा कि मतदाता सूची के प्रारूप प्रकाशन के समय पांच श्रेणियों एब्सेंट (अनुपस्थित), शिफ्टेड (स्थानांतरित), डेथ (मृत), डुप्लीकेट (दोहरे पंजीकरण) और रिफ्यूज टू साइन (हस्ताक्षर से इनकार) के मतदाताओं को शामिल नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 'रिफ्यूज टू साइन' श्रेणी के अंतर्गत दो प्रकार के मामले आते हैं।
पहली श्रेणी में वे मतदाता शामिल हैं जो भारत की मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के बावजूद किसी अन्य देश में जाकर वहां की नागरिकता प्राप्त कर चुके हैं और उन्होंने भारतीय मतदाता सूची से अपना नाम नहीं हटवाया है। दूसरी श्रेणी में वे विदेशी नागरिक आते हैं जो कानूनी अथवा अवैध रूप से झारखंड में रह रहे हैं और जिन्होंने पूर्व में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) या मतदाता सूची के सतत अद्यतन के दौरान प्रपत्र-6 में झूठी घोषणा देकर अवैध रूप से मतदाता के रूप में पंजीकरण करा लिया है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि भारतीय संविधान, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम-1950 तथा भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार विदेशी नागरिक भारत में मतदाता के रूप में पंजीकृत होने के पात्र नहीं हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के इस प्रावधान को देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा है और स्पष्ट किया है कि विदेशी नागरिकों को मतदाता बनने का अधिकार प्राप्त नहीं है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-31 तथा अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत गणना फ़ॉर्म (इन्यूमरेशन फॉर्म) पर हस्ताक्षर कर झूठी घोषणा देना दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जा सकती है।
के. रवि कुमार ने कहा कि झारखंड में रह रहे विदेशी नागरिकों से अपेक्षा की जाती है कि वे इन्यूमरेशन फॉर्म पर हस्ताक्षर किए बिना उसे बीएलओ को वापस कर दें। इसके बाद बीएलओ क्षेत्रीय सत्यापन के आधार पर अपना निष्कर्ष दर्ज करेंगे और फॉर्म में निर्धारित स्थान पर कारणों का उल्लेख करेंगे।
उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समावेशी बनाने में बीएलए-2 की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। बूथ स्तर पर कार्यरत बीएलओ को मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण में राजनीतिक दलों के बीएलए-2 का सहयोग अपेक्षित है, जिससे मतदाता सूची की निष्पक्ष और समकालीन जांच सुनिश्चित की जा सके।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि अनकलेक्टेबल इन्यूमरेशन फॉर्म एएसडीडी (एब्सेंट, शिफ्टेड, डेथ एवं डुप्लीकेट) सूची का हिस्सा होंगे। इस सूची को प्रत्येक मतदान केंद्र पर बीएलओ और बीएलए-2 की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। बैठक की पूरी कार्यवाही दर्ज की जाएगी तथा उसकी तस्वीरों और अभिलेखों को संबंधित बीएलओ द्वारा ईसीआईनेट पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बीएलए-2 की नियुक्ति मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा इस उद्देश्य से की जाती है कि एसआईआर प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके और बूथ स्तर पर तैयार की जा रही मतदाता सूची का समकालीन अंकेक्षण एवं परीक्षण किया जा सके।
रवि कुमार ने बताया कि एएसडीडी सूची सभी मतदान केंद्रों, पंचायत भवनों तथा शहरी स्थानीय निकायों के कार्यालयों में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी। इसके अतिरिक्त प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के दौरान सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को एएसडीडी सूची की एक प्रति भी उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन की तिथि 5 अगस्त, 2026 निर्धारित है।
उन्होंने कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह सूची जिला निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की वेबसाइट पर भी सर्चेबल फॉर्मेट में उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि आम नागरिक और राजनीतिक दल इसकी जांच कर सकें।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

