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भारत को मक्का अनुसंधान और विकास का वैश्विक केंद्र बनाएं वैज्ञानिक : डॉ. एमएल जाट

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भारत को मक्का अनुसंधान और विकास का वैश्विक केंद्र बनाएं वैज्ञानिक : डॉ. एमएल जाट


भारत को मक्का अनुसंधान और विकास का वैश्विक केंद्र बनाएं वैज्ञानिक : डॉ. एमएल जाट


रांची, 09 अप्रैल (हि.स.)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. मांगी लाल जाट ने भारत को मक्का अनुसंधान, विकास और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए वैज्ञानिकों से ठोस प्रयास करने का आह्वान किया है। उन्होंने इसके लिए बेहतर डेटा इको सिस्टम, विभिन्न शोध संस्थानों के बीच समन्वय और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

डॉ. जाट गुरुवार को बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित मक्का पर आधारित अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना की 69वीं वार्षिक कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आंकड़ों को व्यवस्थित तरीके से संकलित कर उनका उपयोग सटीक पूर्वानुमान के लिए किया जाना चाहिए, न कि केवल विश्लेषण के लिए।

उन्होंने पोषक तत्वों के सीमित संसाधनों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे मक्का प्रभेदों के विकास पर ध्यान देना चाहिए, जो कम संसाधनों में अधिक उत्पादन दे सकें। साथ ही वैज्ञानिकों के प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के लिए उन्हें देश-विदेश की श्रेष्ठ प्रयोगशालाओं में भेजने पर बल दिया।

आईसीएआर के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डीके यादव ने इस मौके पर बताया कि देश में मक्का की उत्पादकता 2014-15 में 2567 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में 3590 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है। उन्होंने वर्ष 2030-31 तक इसे 4100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा, हालांकि वैश्विक औसत 6000 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से यह अभी भी कम है।

कार्यक्रम में बीएयू के कुलपति डॉ. एससी दुबे ने कहा कि झारखंड और बिहार में मक्का उत्पादन बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि झारखंड में वर्तमान उत्पादकता 2.4 टन प्रति हेक्टेयर है, जो राष्ट्रीय औसत 3.5 टन से कम है। उन्होंने उच्च प्रोटीन वाली किस्मों के विकास, रोग-कीट नियंत्रण और बीज उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।

आईसीएआर के सहायक महानिदेशक (खाद्य एवं चारा फसलें) डॉ. एसके प्रधान ने कहा कि विश्व में अनाज उत्पादन में मक्का पहले स्थान पर है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में मक्का उत्पादन 1299 मिलियन टन, गेहूं 740 मिलियन टन और चावल 540 मिलियन टन है।

भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. एचएस जाट ने स्वागत भाषण में बताया कि देश में उपयोग होने वाले एथनॉल का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा मक्का से प्राप्त होता है।

कार्यशाला में देश के 37 कृषि विश्वविद्यालयों और आईसीएआर संस्थानों के 250 से अधिक वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इस अवसर पर नवाचार आधारित कृषि को बढ़ावा देने के लिए चोरेया (चान्हो) के किसान नंदकिशोर साहू और रांची के अभिषेक मिश्र को सम्मानित किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak