home page

आदिवासी महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर आईसीपीआरडी की महत्वपूर्ण पहल

 | 
आदिवासी महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर आईसीपीआरडी की महत्वपूर्ण पहल


देवघर, 14 मई (हि.स.)। इंडिपेंडेंट कमीशन फॉर पीपुल्स राइट्स एंड डेवलपमेंट (आईसीपीआरडी) की ओर से झारखंड में आदिवासी एवं वंचित महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है।

इस संबंध में विस्तृत जानकारी डॉ. नंदिनी अजद की ओर से प्रस्तुत की गई। आईसीपीआरडी, जिसकी स्थापना वर्ष 1996 में हुई थी, एक राष्ट्रीय स्तर का जन-अधिकार एवं विकास समर्थक संगठन है। यह संस्था समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों, विशेषकर महिलाओं, आदिवासी समुदायों, श्रमिकों, किसानों और युवाओं के अधिकारों की रक्षा और उनके समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। संस्था नीति पैरवी, जन-संगठन, क्षमता निर्माण, शोध, प्रशिक्षण तथा विभिन्न संगठनों के बीच सहयोग और नेटवर्क निर्माण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाती है।

पिछले दो दशकों में आईसीपीआरडी ने देश के 21 राज्यों और 158 जिलों में लगभग 1,000 से अधिक स्वैच्छिक संस्थाओं एवं सामुदायिक संगठनों के साथ मिलकर कार्य किया है। संस्था द्वारा समूह निर्माण, माइक्रो क्रेडिट कार्यक्रम, महिला सशक्तिकरण, सुशासन के मुद्दों पर संवाद तथा महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा के विरोध में कई महत्वपूर्ण अभियान संचालित किए गए हैं। झारखंड के संदर्भ में आईसीपीआरडी की परियोजना “विकास से वंचित आदिवासी महिलाओं के संस्थानों का निर्माण” का मुख्य उद्देश्य स्थानीय महिलाओं को उनके पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक पहचान के आधार पर विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके तहत महिला समूहों का गठन कर उन्हें संगठित एवं सशक्त बनाया जा रहा है, ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर सरकारी योजनाओं तक अपनी पहुंच सुनिश्चित कर सकें।

आईसीपीआरडी ने अपने सहयोगी संगठनों आरडीटीएफ (आरडीटीएफ), साथी, दृढ़ संकल्प तथा प्रवला सेवा संस्था के साथ मिलकर दुमका, गोड्डा और जामताड़ा जिलों के 30 चयनित गांवों में कार्य प्रारंभ किया है। इन गांवों का चयन शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, बिजली, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी तथा सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के आधार पर किया गया है।

परियोजना के तहत महिलाओं को संगठित करने, नेतृत्व क्षमता विकसित करने, जागरूकता बैठकें आयोजित करने तथा स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक माध्यमों के जरिए उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। साथ ही उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे पंचायत प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष अपनी समस्याएं एवं मांगें रखें तथा सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करें।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / Anup Kumar Roy