माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विवाद मामले में कोर्ट ने कहा- अभ्यर्थी चाहें तो दें पुनः परीक्षा
रांची, 07 मई (हि.स.)। माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विवाद से संबंधित अर्चना कुमारी और अन्य की याचिका पर गुरूवार को उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। मामले में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की कोर्ट ने प्रार्थियों को अंतरिम राहत नहीं दी।
प्रार्थियों ने पुनः परीक्षा पर रोक लगाने का आग्रह कोर्ट से किया था। कोर्ट ने कहा कि परीक्षार्थी चाहें तो उक्त परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में अब प्रार्थियों सहित सभी 2819 अभ्यर्थी 08 और 09 मई को प्रस्तावित पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में अगर शामिल होना चाहते हैं तो हो सकते हैं। मामले में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल और राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने पक्ष रखा। उनकी ओर से अदालत को बताया गया कि उक्त परीक्षा में 24 हजार परीक्षार्थी शामिल हुए, यह परीक्षा कंप्यूटर आधारित थी। 2819 अभ्यर्थी के आईपी एड्रेस में हैकिंग पाई गई थी, जिसके कारण इनकी पुनर्परीक्षा लिए जाने का निर्देश जेएसएससी ने दिया है।
इन सभी अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड भी जारी कर दिया गया है। मामले में कोर्ट ने प्रार्थियों के पुनर्परीक्षा पर रोक से संबंधित अंतरिम राहत देने को अस्वीकार करते हुए प्रार्थियों को निर्देश दिया से कहा कि वह चाहें तो पुनर्परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। वहीं, कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार और जेएसएससी को एक जुलाई 2026 तक नियुक्ति संबंधी अनुशंसा राज्य सरकार को करनी है। 02 जुलाई को जेएसएससी को अदालत में अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करना है।
वहीं, अर्चना कुमारी की रिट याचिका पर अदालत ने 18 जून तक जेएसएससी को शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। प्रार्थी 25 जून तक इस शपथ पत्र पर अपना प्रतिउत्तर दाखिल कर सकते हैं। मामले में अगली सुनवाई 05 जुलाई को होगी।
दरअसल, अर्चना कुमारी और अन्य अभ्यर्थियों ने मामले में रिट याचिका दायर की है। जिसमें मूल आग्रह में जेएसएससी को मॉडल आंसर दिखाने का आदेश देने का आग्रह किया है ताकि वह मॉडल आंसर के विरुद्ध आपत्ति दे सकें। वहीं संशोधन पिटीशन के माध्यम से प्रार्थियों ने इस रिट याचिका में जेएसएससी के द्वारा जारी 23 अप्रैल 2026 को जारी नोटिस को चुनौती दी है।
नोटिस के जरिए जेएसएससी ने 2819 अभ्यर्थियों (जिनमें 20 प्रार्थी भी शामिल हैं) को आठ मई को प्रस्तावित पेपर-2 की पुनः परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया है। उनकी ओर से अदालत को बताया गया था कि बिना परीक्षा केंद्र के अधिकृत व्यक्तियों की पहचान किए और बिना दोषी अभ्यर्थियों को चिन्हित किए, सभी 2819 अभ्यर्थियों को एक साथ पुनर्परीक्षा के लिए बाध्य करना अवैध और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
कोर्ट ने कहा कि प्रार्थी किसी भी प्रकार के अनुचित साधनों में शामिल नहीं रहे हैं, लेकिन उन्हें भी दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा है। आयोग को पहले कथित अनियमितताओं में शामिल परीक्षा केंद्र के अधिकृत व्यक्तियों और संबंधित अभ्यर्थियों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, न कि सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से परेशान करना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

