home page

भारतमाला परियोजना में भूमि अधिग्रहण से प्रभावित गरीब आदिवासी रैयतों को मिले न्याय: संजीव

 | 
भारतमाला परियोजना में भूमि अधिग्रहण से प्रभावित गरीब आदिवासी रैयतों को मिले न्याय: संजीव


रामगढ़, 01 अगस्त (हि.स.)। बंगाल से झारखंड होते हुए उत्तर प्रदेश तक बनने वाली भारतमाला परियोजना गरीब आदिवासियों को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। यह बात रामगढ़ व्यवहार न्यायालय के गवर्नमेंट प्लीडर संजीव कुमार अम्बष्ट ने कही। उन्होंने भारतमाला परियोजना के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण से प्रभावित गरीब आदिवासी रैयतों की समस्या को लेकर एक महत्वपूर्ण पत्र राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग, झारखंड सरकार के सचिव तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव को भेजा है।

पत्र में बताया गया है कि रामगढ़ जिला के ग्राम बुमरी (हकुरनंदा), थाना- मांडू (ओ.पी. कुजू) के कई गरीब आदिवासी परिवारों की जमीन वाराणसी–कोलकाता 4/6 लेन एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेस-वे (भारतमाला परियोजना) के लिए अधिग्रहित की गई है।

इन परिवारों का कहना है कि उनके पूर्वजों को कई दशक पहले तत्कालीन जमींदार द्वारा हुकुमनामा/बंदोबस्ती के माध्यम से यह जमीन विधिवत दी गई थी। तब से वे लगातार जमीन पर खेती करते आ रहे हैं। उन्होंने पहले जमींदार को लगान दिया और बाद में सरकार को नियमित रूप से मालगुजारी एवं राजस्व का भुगतान किया। इसके समर्थन में उन्होंने हुकुमनामा, लगान रसीद, सरकारी राजस्व रसीद, अमीन रिपोर्ट तथा अन्य दस्तावेज भी अधिकारियों को उपलब्ध कराए हैं।

इसके बावजूद केवल राजस्व अभिलेखों में जमीन को गैरमजरूआ दर्ज होने के कारण उन्हें मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें मुआवजा संबंधी कोई नोटिस भी नहीं मिला है, जबकि उनकी जमीन परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा चुकी है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि भारतमाला परियोजना राष्ट्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन विकास के नाम पर गरीब और आदिवासी परिवारों को उनकी पुश्तैनी जमीन से वंचित करना उचित नहीं है। यदि किसी व्यक्ति का बंदोबस्ती, कब्जा और राजस्व भुगतान के दस्तावेज सही पाए जाते हैं, तो उसके दावे की निष्पक्ष जांच कर उसे कानून के अनुसार उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।

संजीव कुमार अम्बष्ठा ने अपने पत्र में झारखंड सरकार से अनुरोध किया है कि उपायुक्त, रामगढ़, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी तथा अंचल अधिकारी, मांडू को सभी दस्तावेजों की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया जाए, ताकि वास्तविक और पात्र रैयतों को न्याय मिल सके।

उन्होंने यह भी कहा है कि यह समस्या केवल रामगढ़ जिले तक सीमित नहीं है। पूरे झारखंड में हजारों भूमि प्रभावित परिवार इसी प्रकार की समस्या का सामना कर रहे हैं। इनमें अधिकांश गरीब आदिवासी परिवार हैं, जिनकी आजीविका का मुख्य साधन खेती है। यदि उन्हें समय पर उचित मुआवजा नहीं मिला तो अनेक परिवार भूमिहीन होकर गंभीर आर्थिक संकट में आ जाएंगे।

उन्होंने राज्य सरकार तथा भारत सरकार से अपील की है कि ऐसे सभी मामलों में संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए वास्तविक पात्र भूमि प्रभावित परिवारों के दावों की निष्पक्ष जांच कर उन्हें कानून के अनुसार उचित मुआवजा एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / अमितेश प्रकाश