भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता उसकी विविधता है: राज्यपाल
रांची, 08 मई (हि.स.)। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि यह मेला केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की विविधतापूर्ण सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता की जीवंत अभिव्यक्ति है।
राज्यपाल शुक्रवार को रांची स्थित भगवान बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान में बंगाली युवा मंच चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आयोजित ‘बांग्ला सांस्कृतिक मेला-2026’ के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे।
राज्यपाल ने आयोजन के लिए सभी आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं को सहेजना किसी भी समाज की पहचान और शक्ति का प्रतीक होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता उसकी विविधता है, जहाँ विभिन्न भाषाएं, परंपराएं और जीवन-शैलियां मिलकर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त बनाती हैं।
उन्होंने कहा कि बांग्ला संस्कृति साहित्य, संगीत, कला एवं सामाजिक चेतना के क्षेत्र में अपने समृद्ध योगदान के लिए विश्वविख्यात रही है। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर और बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय जैसे महान साहित्यकारों ने अपने विचारों एवं रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रभक्ति, मानवता और सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया।
राज्यपाल ने कहा कि बांग्ला संगीत, लोक परंपराएं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां हमारी साझा विरासत की अमूल्य धरोहर हैं। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि झारखण्ड सदैव से विभिन्न संस्कृतियों के संगम की भूमि रहा है और बंगभाषी समाज ने यहाँ की सामाजिक एवं सांस्कृतिक चेतना को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आधुनिकता को अपनाते हुए अपनी संस्कृति एवं परंपराओं को भी समान महत्व देना आवश्यक है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है तथा स्थानीय संस्कृतियों, परंपराओं और कलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में एकता, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा के संचार का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने सभी से अपनी सांस्कृतिक विरासत को गर्व के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

