स्वदेशी केवल उत्पाद नहीं, आत्मगौरव और आत्मनिर्भरता का आधार है: राज्यपाल
रांची, 01 मई ( हि.स.)। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची के ऑड्रे हाउस में शुक्रवार शाम तीन दिवसीय सांसद सांस्कृतिक महोत्सव-सह-स्वदेशी मेला-2026 का संयुक्त रुप से उद्घाटन किया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि स्वदेशी केवल उत्पाद नहीं, बल्कि आत्मगौरव और आत्मनिर्भरता का आधार है। उन्होंने इस आयोजन के लिए माननीय केन्द्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ समेत सभी आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि यह महोत्सव हमारी सांस्कृतिक अस्मिता, स्वदेशी चेतना और आत्मनिर्भरता के संकल्प का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जो राष्ट्र अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है, वही समय की हर कसौटी पर खरा उतरता है।
राज्यपाल ने इस अवसर पर ऑड्रे हाउस के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्थल हमारे स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी महत्वपूर्ण स्मृतियों का भी साक्षी रहा है। इतिहासकारों के अनुसार, यहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का वर्ष 1917 में आगमन हुआ था। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक भवन में स्वदेशी और सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा यह आयोजन अत्यंत प्रेरणादायक है।
राज्यपाल ने कहा कि झारखण्ड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराएं एवं हस्तशिल्प हमारी अमूल्य धरोहर हैं। यहां के लोकनृत्य, लोकगीत एवं शिल्पकला केवल कला नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और जीवन-दर्शन के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि हमारे कारीगरों और शिल्पकारों के कौशल में सृजन, संवेदना और परंपरा की गहराई निहित हैं, जिसे प्रोत्साहित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ एवं ‘आत्मनिर्भर भारत’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को बढ़ावा देना आवश्यक है। इससे न केवल आर्थिक सशक्तिकरण होगा, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत भी सुदृढ़ होगी।
राज्यपाल ने सभी कलाकारों, शिल्पकारों एवं प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी कला इस आयोजन को जीवंत बनाती है और समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ती है। उन्होंने सभी से स्वदेशी को अपनाने, अपनी संस्कृति को संरक्षित करने तथा कारीगरों को सशक्त बनाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह महोत्सव सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा देगा और स्वदेशी भावना को और सुदृढ़ करेगा।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने स्वदेशी उत्पादों के महत्व पर प्रकाश डाला। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश में अनेक विविधताएं हैं। देश के भीतर कई विभिन्न समाज एवं वर्ग के लोग रहते हैं जिनकी अलग-अलग खूबी और पहचान है। यही खूबी और पहचान देश का एक मजबूत स्तंभ भी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वदेशी का मतलब स्वयं उत्पादित वस्तुएं होती है। देश के भीतर उत्पादित वस्तुओं को अधिक से अधिक बढ़ावा मिले यह हम सभी की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार निरंतर इस दिशा में बेहतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी स्वदेशी को अपनाया तथा स्वदेशी अपनाने के प्रति देशवासियों को प्रेरित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वदेशी मेला न केवल स्थानीय कारीगरों, हस्तशिल्पियों और उद्यमियों को एक सशक्त मंच प्रदान करता है बल्कि यह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने का भी सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने इस आयोजन के लिए केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ को अपनी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सरकार द्वारा गांव तथा शहरों में कई कार्यक्रमों अथवा आयोजनों के माध्यम से स्वदेशी उत्पादों को प्रमोट किया जा रहा है। आज इस ऐतिहासिक ऑड्रे हाउस परिसर में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य भी स्वदेशी वस्तुओं के साथ-साथ राज्य की कला-संस्कृति को बढ़ावा देना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड प्रदेश खनिज संपदाओं से पहचाना जाता है। ईश्वर ने इस राज्य में जमीन के अंदर के साथ-साथ जमीन के ऊपर भी काफी आकर्षक और खूबसूरत संपदाएं दी है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज स्वदेशी खान-पान के साथ जिस प्रकार जीवनयापन करना सिखा था वह काफी प्रभावित करने वाली चीजें हैं। उन्होंने कहा कि कहीं न कहीं आज के वर्तमान दौर में मनुष्य कई ऐसी चीजों से प्रभावित हैं जिससे शरीर के आंतरिक तथा वाह्य वस्थाओं में भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के लोगों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। हमारे राज्य के युवा शिक्षा, संस्कृति तथा खेलकूद सहित विभिन्न क्षेत्रों में बहुत आगे हैं। हमारे बच्चे सीमित संसाधनों के बीच हर मंच पर राज्य का गौरव बढ़ा रहे हैं। इस राज्य की कला-संस्कृति की देश-दुनिया में अलग पहचान है। यहां के कलाकार कोई परिचय के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में इस राज्य के सरकारी स्कूलों में अध्यनरत बच्चे नेशनल लेवल पर आयोजित प्रतियोगिता-परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर अपने प्रतिभा को लोहा मनवा रहे हैं, यह हम सभी के लिए गर्व का विषय है।
मौके पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि झारखंड की संस्कृति, पहचान, विविधता, परंपरा, लोक कला साथ ही यहां के लोक नृत्य संगीत को एक ही छत के नीचे कला संस्कृति के माध्यम से उनका संरक्षण और संवर्धन के लिए स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करने का वृहद अलौकिक, सुंदर कार्य सांसद सांस्कृतिक महोत्सव स्वदेशी मेला के माध्यम से किया गया है, जो हमारे स्वदेशी कला संस्कृति और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने का एक सशक्त माध्यम भी है ।
इस अवसर पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने परिसर में लगे विभिन्न स्टॉलों का भी अवलोकन किया।
इस अवसर पर सांसद राज्यसभा आदित्य साहू, सांसद राज्यसभा दीपक प्रकाश, विधायक नवीन जायसवाल, महापौर रोशनी खलखो, उप महापौर नीरज कुमार, पूर्व राज्यसभा सांसद अजय मारू सहित अन्य गणमान्य, प्रबुद्धजन, विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोक कलाकार सहित अन्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

